हल्के में नहीं लें खांसी को, इस लक्षण की जागरूकता जरूरी – कुमार आनंद
संजय मिश्र
दरभंगा
दो सप्ताह तक की खांसी में मुख्य कारण गले का वायरल इंफेक्शन ही होता है। परंतु निमोनिया में खांसी दो हफ्ता से ज्यादा तक रह सकता है। दमा में तो खांसी कई कई सप्ताह हो सकती है। खांसी वास्तव में एक लक्षण है जो शरीर अपने सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करता है। संक्रमण से जब कफ बन जाता है तो खांसी के द्वारा इसे शरीर से बाहर निकाला जाता है। परंतु हमेशा यह नहीं होता। कई बार वायरल इंफेक्शन या अन्य कारणों से श्वसन तंत्र की संवेदनशीलता बढ़ जाती है और वह छोटे-मोटे कारण पर भी खांसने लगता है।
यह बातें डॉक्टर कुमार आनंद ने दरभंगा में कही। वे डीएमसीएच में आयोजित आई ए पी (इंडियन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक्स) के नियमित सी एम इ (कंटीनियूइंग मेडिकल एजुकेशन) के तहत शनिवार देर शाम सर्दी और खांसी पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि दमा के केस में संवेदनशीलता काफी बढ़ गई रहती है। डॉक्टर आनंद ने खांसी के कारण के पता लगाने पर जोर दिया और कारण के निदान को प्रमुख बताया। खांसी के लिए प्रारंभिक तौर पर घरेलू उपचार ज्यादा अच्छे हैं, परंतु जब यह ज्यादा तकलीफ दे रहा हो तो उस समय में खांसी के लिए सिरप का इस्तेमाल किया जा सकता है। कफ सिरप देते समय हमेशा यह ध्यान रखना है कि उसमें इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल सुरक्षित हों।
चर्चा में डॉक्टर एम पी गुप्ता, डॉक्टर रिजवान हैदर, डॉक्टर साजिद हुसैन, डॉक्टर इशरत परवीन एवं डॉक्टर पल्लवी झा ने भी भाग लिया। कार्यक्रम में डॉक्टर कमोद झा, डॉक्टर मिथिलेश कुमार सिंह, डॉक्टर चंदन झा, डॉक्टर प्रमोद, डॉ अमरेश कुमार साहू, डॉ अरविंद झा, डॉक्टर इरशाद आलम एवं डॉ ओम प्रकाश उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर के एन मिश्रा एवं संचालन डॉ एस सी यादव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ अशोक कुमार ने किया।

