गांधी के आदर्शों को अपनाएं, निस्तुकी बदलेगा समाज : उदय शंकर यादव
हायाघाट के रसलपुर छोटकी कोठी में श्रद्धा के साथ मनाई गई गांधी जयंती
संजय मिश्र
दरभंगा
इंडिया के अन्य भागों की तरह मोहनदास करमचंद गांधी की 156 वीं जयंती 2 अक्टूबर को पूरी श्रद्धा के साथ दरभंगा में मनाई गई। जिले के हायाघाट विधान सभा क्षेत्र के रसलपुर छोटकी कोठी गांव में इंडी गठबंधन के बैनर तले कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस मौके पर गठबंधन के संयोजक सह आरजेडी जिला अध्यक्ष उदय शंकर यादव ने कहा कि देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उसूलों की प्रासंगिकता बनी हुई है। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने गांधी के जीवन और सार्वजनिक जीवन में अपनाए गए उनके आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गांधीजी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर (गुजरात) में हुआ। लंदन में पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेद के खिलाफ आंदोलन चलाया। इंडिया लौटने के बाद मोहनदास ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के प्रयोग को अपनाया। इसका लोगों पर चमत्कारिक असर हुआ।
उदय यादव ने याद कराया कि आजादी के आंदोलन के बीच छुआ छूत खत्म करने जैसे समाज सुधार के अभियान चलाए। जिलाध्यक्ष ने लोगों का आह्वान किया कि वे गांधी के किसी एक आदर्श को अपने जीवन में अपनाएं तो समाज में सकारात्मक विचार फैलेगा।
सभा में भाकपा माले के जिला सचिव वैद्यनाथ यादव, हायाघाट प्रखंड के उपप्रमुख आशिफ अली, ग्राम रसलपुर के मुखिया अलाउद्दीन, इमरान खान, आरजेडी नेता हीरा दास, इसी पार्टी के एस सी प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव सुभाष पासवान, इजाज अहमद, दुलारे, देबू पासवान, हरिजी, गुलशन राम, अब्दुल सहित कई अन्य प्रमुख नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। तमाम लोगों ने गांधीजी के चित्र पर फूल चढ़ाकर उन्हें श्रद्धा अर्पित की। और उनके विचारों को अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। इस अवसर पर वक्ताओं ने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे गांधी के बताए रास्ते के प्रकाश में एक बेहतर और समतामूलक समाज के निर्माण के सहभागी बनें। गौर करने वाली बात है कि लोहिया, कर्पूरी और मार्क्स माओ की विरासत से साभा रखने वाले सियासी लोगों ने गांधी बंदन में खास रुचि दिखाई। प्राकृतिक रूप से गांधी की विरासत को अपना बताने वाले राहुल गांधी के बिहार में 17 दिनो की यात्रा के बाद फिजा बदली है। जब बीजेपी गांधी गाथा में सम्मान दर्शा सकती है तो समाजवादी और वाम धारा के नेताओं के लिए गांधी श्रद्धा सियासी जरूरत तो हो ही सकती!

