“संस्कृत साहित्य के संवर्धन में मिथिला का योगदान” विषय पर राष्ट्रीय परिसंवाद संगोष्ठी का हुआ आयोजन

दरभंगा। एम एल एस एम कॉलेज दरभंगा के सेमिनार कक्ष में साहित्य अकादमी नई दिल्ली एवं एम एल एस एम कॉलेज, दरभंगा के संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “संस्कृत साहित्य के संवर्धन में मिथिला का योगदान” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय परिसंवाद संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की शुरुआत महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा मंगलाचरण गाकर किया गया। मंगलाचरण के बाद आगत अतिथियों का पाग चादर एवं फूलों की माला से स्वागत किया गया। तदुपरांत आगत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। पहले सत्र की अध्यक्षता कर रहे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हमें अपने इतिहास का गौरव बोध होना चाहिए। जिसे अपने इतिहास और संस्कृति का ज्ञान नहीं होता है उसका भूगोल भी मिट जाता है। मिथिला का इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। यह विद्वानों की धरती है। अतः इस पर गहन विमर्श करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम हेतु महाविद्यालय एवं साहित्य अकादेमी दोनों ही साधुवाद के योग्य हैं। बीज भाषण करते हुए प्रोफेसर देव नारायण झा पूर्व कुलपति कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा ने अपने विशिष्ट वक्तव्य में कहा कि मिथिला शास्त्रों की उत्पत्ति स्थली है। पूरे विश्व में विकसित संस्कृत शास्त्रों के पचहत्तर प्रतिशत भाग का विकास मिथिला के विद्वानों द्वारा ही हुआ है। मिथिला के समान शास्त्रसमृद्ध स्थल विश्व में कोई जगह नहीं है। मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर शशी नाथ झा कुलपति कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा ने शब्दकोश एवं धर्म शास्त्र के विभिन्न आयामों में मैथिल विद्वानों के योगदान पर बल दिया। ऑनलाइन माध्यम से जुड़े कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गंगाधर पंडा ने संपूर्ण विश्व में याज्ञवल्क्य स्मृति के प्रसार की बात करते हुए विभिन्न विषयों में मिथिला के योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में साहित्य अकादेमी के उप सचिव एन सुरेश बाबू ने अपने स्वागत भाषण के माध्यम से मैथिल विद्वान एवं मिथिला भूमि का अभिनंदन करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम में आए समस्त आलेख का पुस्तक के रूप में प्रकाशन करवाया जाएगा जिससे समस्त संसार मिथिला द्वारा संस्कृत साहित्य को किये गए योगदान को जान सके। प्रधानाचार्य डॉ मंजू चतुर्वेदी ने आगत अतिथियों का स्वागत किया । कार्यक्रम का संचालन प्रो० प्रेम मोहन मिश्रा ,सदस्य साहित्य अकादमी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ विनय कुमार झा संस्कृत विभागाध्यक्ष एम एल एस एम कॉलेज, दरभंगा ने किया।
द्वितीय सत्र तकनीकी सत्र के रूप में आयोजित हुआ जिसमें प्रोफेसर विद्याधर मिश्र पूर्व कुलपति कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, प्रोफ़ेसर बौआनन्द झा , पूर्व दर्शन विभागाध्यक्ष, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, डॉ. अशोक झा अविचल , संयोजक, मैथिली परामर्शदात्री समिति, साहित्य अकादमी नई दिल्ली, प्रोफ़ेसर जीवानन्द झा , विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, डॉ संजीत कुमार झा ,सहायक प्राध्यापक ,संस्कृत विभाग सीएम कॉलेज, दरभंगा ने संस्कृत के विभिन्न पक्षों में मिथिला के योगदान पर आलेख पाठ किया । इस सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर प्रेम मोहन मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ विनय कुमार झा ने किया।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *