दरभंगा। राज्य परियोजना निदेशक ने सभी जिलों को आवंटन जारी करते हुए आदेश दिया था की 24 घंटे के अंदर शिक्षकों के वेतन भुगतान को सुनिश्चित किया जाए लेकिन वेतन भुगतान की जटिल प्रक्रिया में 24 घंटे तो दूर की बात 240 घंटो में भी भुगतान हो जाए तो इसे शिक्षा विभाग की मेहरबानी कही जा सकती है। दरअसल एक ओर जहां अन्य विभागों में कर्मचारियों और अधिकारियों को दिवाली से पूर्व ही सरकार के द्वारा वेतन का भुगतान कर दिया गया था वही दूसरी ओर शिक्षकों का वेतन आवंटन के आभाव में छठ के बाद भी भुगतान नही हो सका। शिक्षक किसी तरह से छठ जैसे लोक आस्था का पर्व मना सके। अब जब छठ के बाद आवंटन की राशि जारी भी हुई तो अमूमन भुगतान में एक सप्ताह से अधिक का समय लग जाता हैं। दरअसल शिक्षकों के वेतन की राशि जिला कार्यक्रम पदाधिकारी एसएसए के खाते पर आती है और फिर वहां से स्थापना को और स्थापना से चेक के माध्यम से बैंक द्वारा भुगतान किया जाता है ऐसे में यह कही से संभव नही दिखता की 24 घंटे में भुगतान हो सके। वेतन भुगतान जैसे विषय पर सरकार की उदासीनता को आड़े हाथ लेते हुए टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट ने सरकार पर बड़ा आरोप मढ़ा है की बिहार सरकार शिक्षकों के वेतन को मजाक बनाकर रख दी है। संघ के जिलाध्यक्ष प्रमोद मंडल, प्रदेश मिडिया प्रभारी सोनू मिश्रा, महासचिव रंजन पासवान, प्रवक्ता धनंजय झा ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है की जब शिक्षकों की दिवाली अंधेरे में तथा छठ कर्ज में बीत ही चुका है तो फिर अब आवंटन जारी करने का क्या औचित्य रह जाता है? क्या निदेशक को ज्ञात नही की शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया कितनी जटिल है? आजतक कितने बार उनके आदेश का अनुपालन हुआ है? वे प्रत्येक बार 24 घंटे में वेतन भुगतान का आदेश देकर अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं। जब अन्य विभाग समेत शिक्षा विभाग के ही अधिकारी और कर्मी के वेतन भुगतान का आवंटन अखबारों का हेडिंग नही बनता तो शिक्षकों का क्यों? सरकार शिक्षकों के वेतन भुगतान जैसे विषय पर मजाक बनाना बंद करें यह शिक्षकों के साथ क्रूर मजाक है। अन्यथा शिक्षक अपने साथ हो रहे अपमान के प्रतिकार स्वरूप आंदोलन को बाध्य होंगे।
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