मोहन चन्द्रवंशी
दरभंगा। कभी भी छात्र व शोधार्थियों से विश्वविद्यालय होता है न कि विश्वविद्यालय से छात्र व शोधार्थी। उस छात्र व शोधार्थी ने कभी कुलपति से विनम्र निवेदन किया था कि पीएचडी विभाग में कम से कम एक महिला कर्मी की नियुक्ति अनिवार्य रूप से होनी चाहिये ताकि महिला शोधार्थी उनके साथ फ्रेंडली हो सके। जिसको लेकर पीएचडी में कुलपति को लिखित आवेदन देकर रानी झा जैसे स्वच्छ व सकारात्मक छवि वाले कर्मी के लिये अनुरोध किया गया था। अनुरोध सुनने के बाद कुलपति ने मौखिक तौर पर यह भरोसा दिया था कि कोई न कोई एक महिला कर्मी का पदस्थापन अब पीएचडी विभाग में जरूर रहेगा और कुलपति ने उस अनुरोध को स्वीकार कर टेबल ट्रांसफर के माध्यम से कर्मी श्रीमती झा को फौरन पीएचडी विभाग में तबादला कर दिया था। उस समय कुलपति के इस बोल्ड निर्णय से शोधार्थियों में खुशी की लहर देखी जा सकती थी। सब कुलपति का धन्यवाद ज्ञापन कर रहे थे। मगर अफसोस कि दुखद स्थिति यह रही कि महज कुछ ही महीनों में श्रीमती झा का ब्राड गेज से नैरो गेज पर तबादला कर दिया गया। दुनिया अर्थशास्त्र के डिमांड-सप्लाई थ्योरी से चलता है और श्रीमती झा जैसे कर्मी का उस राज लाइब्रेरी में ट्रांसफर किया गया है जहां छात्रों व शोधार्थियों की पहुंच नगण्य है मतलब डिमांड न के बराबर मतलब नैरो गेज। महज कुछ ही महीनों में पीएचडी विभाग के इतिहास का सबसे बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिला था जो मैं दशकों पहले कभी नहीं देखा गया था। पीएचडी की सारी व्यवस्था पटरी पर लौट ही रही थी कि श्रीमती झा का तबादला ब्राड गेज से नैरो गेज पर कर दिया गया। इतने कम दिनों के अंदर एक सकारात्मक कर्मी का इस प्रकार तबादला मिथिला विश्वविद्यालय व शिक्षाविदों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर शोधार्थियों में उनके तबादले के बाद जबरदस्त उबाल है। शोधार्थियों ने “रानी मैडम को वापस भेजना होगा की मांग तेज कर दी है। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि महज इतने कम समय में दरभंगा में आईपीएस मनु महाराज के जैसे उनकी लोकप्रियता सातवें आसमान पर है। इससे साफ झलकता है कि उनकी कार्यशैली भीड़ से बिल्कुल अलग स्वच्छ व सकारात्मक थी। अब देखना दिलचस्प होगा कि पीएचडी विभाग में श्रीमती झा का तबादला रोका जाता है या किसी अन्य महिला कर्मी का नियुक्ति होता है?
जानकी टाइम्स श्रीमती झा से अपील करता है कि राज लाइब्रेरी को भी अपने कदम से नैरो गेज से ब्राड गेज पर लाएं। यह आशा उनसे अपेक्षित है और एक बार फिर जानकी टाइम्स का कुलपति प्रो० सुरेंद्र प्रताप सिंह से विनम्र निवेदन है कि पीएचडी विभाग में महिला शोधार्थियों को ध्यान रखते हुए कम से कम एक महिला कर्मी की नियुक्ति जरूर करना चाहेंगे।