‘अस्मितामूलक विमर्श के विविध आयाम’ पर विभागीय परिषद् की बैठक

दरभंगा। विश्वविद्यालय हिंदी विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में पूर्व प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, जिसका विषय ‘अस्मितामूलक विमर्श के विविध आयाम’ तय किया गया था, पर विभागीय परिषद् की बैठक विभागाध्यक्ष प्रो० राजेन्द्र साह की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में पूर्व निर्धारित तिथि को अपरिहार्य कारणवश थोड़ा आगे बढ़ाते हुए सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 25 अगस्त 2021 को उक्त विषय- ‘अस्मितामूलक विमर्श के विविध आयाम’ पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाए। आज विभिन्न सामाजिक व साहित्यिक अस्मिताओं में अभूतपूर्व रचनात्मक चेतना आयी है। जब हम किसी व्यक्ति,जाति,वर्ग,क्षेत्र आदि की अस्मिता को प्राप्त करवाने या करने के लिए विमर्श करते हैं तो वह अस्मितामूलक विमर्श का द्योतक होता है| वस्तुत:अस्मितामूलक विमर्श वंचितों को उनकी पहचान दिलाने का वह आंदोलन है जो उपेक्षित वर्ग को समाज की मुख्यधारा के लोगों के साथ चलने के लिए सक्षम बनाए | यह विमर्श वंचितों को उनके उभरते अस्तित्व का बोधक होगा तथा सत्ता एवं प्रशासन को भी उनके कर्तव्य का बोध करायेगा ताकि समाज में प्रत्येक व्यक्ति बिना भेदभाव के उन्नति कर सके | मानवतावादी, समतामूलक साहित्य की वैचारिकी अस्मितामूलक विमर्श है।इक्कीसवीं शताब्दी का सम्पूर्ण हिंदी साहित्य किसी – न- किसी बिंदु पर मानवीय अस्मिता पर हो रहे निरन्तर प्रहारों से टकराता है। इसकी पृष्ठभूमि में उपेक्षित ,शोषित ,दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक,स्त्रियाँ आदि शामिल हैं |उत्तर आधुनिक युग के इस नव पूॅऺजीवादी दौर में आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, स्त्रियों, ट्रांसजेंडरों, वृद्धों आदि की जो विषम स्थिति रही है वह किसी से छिपी नहीं है। वस्तुतः साहित्य की यह प्रयोजनशीलता है कि वह समाज को इस सत्य से साक्षात्कार कराये |इन्हीं बिंदुओं को केंद्र में रखकर इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। ‘अस्मितामूलक विमर्श’ से सम्बंधित किसी भी विषय पर 2000-2500 शब्दों का आलेख कुर्तिदेव10 में ( पीडीएफ में नहीं)दिनांक 24.08.2021 तक अनिवार्य रूप से विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो०राजेन्द्र साह के निम्नांकित इमेल hodhindi@lnmu.ac.in अथवा व्हाट्सएप्प नं० 9430414508, 6201673282 पर प्रेषित किया जा सकता है। संगोष्ठी के उपरांत आईएसबीएन युक्त पुस्तक शीघ्र प्रकाशित की जायेगी|संगोष्ठी के आयोजन के पूर्व आॅनलाइन पंजीकरण आवश्यक है|पंजीकृत प्रतिभागियों के ही आलेख प्रकाशित किये जायेंगे|
शिक्षकों के लिए पंजीयन शुल्क 700₹, शोधार्थियों के लिए 500₹ और छात्रों के लिए 200₹ निर्धारित है। शुल्क ऑनलाइन/ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जमा किया जा सकता है। ऑनलाइन शुल्क निम्नांकित खाते में जमा किया जा सकता है –
1)A/c Name- P.G. L.N.M.U DEPT OF HINDI,
2)BANK NAME & BRANCH- CENTRAL BANK OF INDIA, LNMU CAMPUS, DARBHANGA,
3)ACCOUNT NO- 1475544205,
4)IFSC CODE- CBIN0281302
ऑनलाइन शुल्क जमा करने वाले प्रतिभागी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट तथा पूर्णरूप से भरे हुए पंजीयन फॉर्म को उपर्युक्त व्हाट्सएप्प नम्बर पर आवश्यक रूप से भेजेंगे। संगोष्ठी में सम्मिलित होने का प्रमाण-पत्र ससमय निर्गत किया जायेगा।

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