हस्तलिखित कोर्स वर्क प्रमाण-पत्र कानूनन स्वतः निरस्त ।

दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के पैट-2019 के शोधार्थियों को स्वीकृति के बाद भी हस्तलिखित कोर्स वर्क प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है। जिसको लेकर शोधार्थियों ने हस्तलिखित प्रमाण पत्र स्वीकार करने से इंकार कर दिया। विदित हो कि परीक्षा समिति की बैठक में दिनांक 27 जुलाई 2021 को पैट-2019 के शोधार्थियों का हस्तलिखित के जगह कम्प्यूटराइज्ड कोर्स वर्क प्रमाण पत्र निर्गत करने की स्वीकृति मिल चुका है। मतलब कानूनन यह स्पष्ट है कि 27 जुलाई 2021के तिथि से हस्तलिखित कोर्स वर्क प्रमाण-पत्र निरस्त व कंप्यूटराइज्ड कोर्स वर्क प्रमाण-पत्र प्रभावी माना जायेगा। जैसा कि आज ज्ञात हुआ कि कोर्स वर्क प्रमाण-पत्र पर 29 जुलाई 2021 के तिथि में सभी विभागाध्यक्ष का हस्ताक्षर है और कुलसचिव का हस्ताक्षर अगस्त 2021के प्रथम सप्ताह का है फिर वह हस्तलिखित प्रमाण-पत्र स्वतः निरस्त हो गया। जिसे स्वीकार करने का कोई मतलब ही नहीं बनता है। इसीलिए इस पर शोधार्थियों ने विरोध जताते हुए कहा कि जब परीक्षा परिषद में स्वीकृति मिल गया है फिर हस्तलिखित प्रमाण पत्र क्यों निर्गत किया जा रहा है। कई विश्वविद्यालय में ऑनलाइन प्रमाण पत्र भी जारी किया जाता है जिसे कहीं से भी सत्यापित किया जा सकता है, परंतु मिथिला विश्वविद्यालय में स्वीकृति के बाद भी लागू नहीं किया जाना कितना उचित है। हमलोग केवल कम्प्यूटराइज्ड कोर्स वर्क प्रमाण पत्र ही स्वीकार करेंगे। दर्जनों शोधार्थियों ने आज हस्तलिखित कोर्सवर्क प्रमाण-पत्र लेने से इनकार कर दिया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शोधार्थी संघ के अध्यक्ष रघुबर प्रसाद सिंह ने कहा कि हमारा हमेशा से ही कम्प्यूटराइज्ड कोर्स वर्क प्रमाण पत्र की मांग रहा है, जिसे परीक्षा परिषद में भी मुहर लग चुकी है। फिर किस आधार पर हस्तलिखित कोर्स वर्क प्रमाण पत्र निर्गत किया जा रहा है। आखिर विश्वविद्यालय में कुलपति व प्रति कुलपति के आदेश का व परीक्षा परिषद के निर्णय का कोई महत्व नहीं है क्या? हस्तलिखित कोर्स वर्क प्रमाण पत्र किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन इस मुद्दे पर त्वरित संज्ञान लें कर कंप्यूटराइज्ड कोर्स वर्क प्रमाण-पत्र निर्गत करना चाहेंगे नहीं तो शोधार्थी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठेंगे। जिसकी सारी जवाबदेही विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

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