दरभंगा।अल्फ़ाज़-ए-दिल ने आजादी के 75वी वर्षगांठ पर एक खूबसूरत ऑनलाइन ओपन माइक चैलेंज का आयोजन किया।
अल्फ़ाज़-ए-दिल एक ऐसी संस्था है जो छुपे लेखकों व कलाकरों को एक मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को एक नई पहचान देने का काम करती है।
अपनी इसी पहल के दौरान 15 अगस्त को अल्फ़ाज़-ए-दिल ने एक खूबसूरत आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में काफी अधिक सँख्या में कलाकरों और श्रोताओं ने अपना योगदान दिया।
कार्यक्रम का आयोजन ज़ूम एप्प के माध्यम से किया गया। जहाँ देश के अलग अलग जगहों से लोग जुड़े।
कार्यक्रम में अतिथि के रूप मे मुम्बई से बॉलीबुड के जानेमाने वौइस् एंड स्वीच के विशेषज्ञ, डायरेक्टर इरफान जामियावाला जुड़े ।
अल्फ़ाज़-ए-दिल के सीनियर सदस्य एम एम मुमताज़ ने कलाकरों को प्रोत्साहन किया। वही प्रतियोगिता में शामिल जुली झा ने हमारे जवान के परिवार के जीवन पर अपनी कविता पेश की।
वही साधना पल्लवी ठाकुर ने समाज में हो रहे उत्त्पीडऩ पर अपनी कविता रखी। वही साधना झा ने खत्म होती जा रही हिंदी भाषा पर अपनी कविता रखी।
वही कलाकारों ने देशभक्ति रचनाएं सुनाई।
कार्यक्रम का सूंदर संचालन अल्फ़ाज़-ए-दिल के सह- संथापक अटल कर्ण(मैथिलबाबू) और अल्फ़ाज़-ए-दिल के संथापक संदीप समर के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में शामिल कलाकार जुली झा, साधना पल्लवी ठाकुर, साधना झा ,, केशव , रूपक कुमार, अश्विनी कुमार,, दीपशिखा थे।
वही मुख्य अतिथि इरफान जामियावाला ने कहा कि आप सभी कलाकरों में कमाल का हुनर है।
हम बहुत जल्द बिहार में जगह-जगह वर्कशॉप का आयोजन करेंगे।
और छुपी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए काम करेंगे।