दरभंगा। कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग से पीएचडी शोधार्थी के रुप में ऐश्वर्य शेखर का चयन हुआ है।श्री शेखर दरभंगा जिला के केवटी प्रखंड अंतर्गत कमतौल थाना क्षेत्र के गंज रघौली गाँव के रहनेवाले हैं।श्री शेखर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के पूर्व उप-परीक्षा नियंत्रक सह पूर्व अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो० हिमांशु शेखर व पूर्व सीडीपीओ किरण श्रीवास्तव के पुत्र हैं। 3 भाई बहनों में सबसे छोटे शेखर बचपन से ही पढ़ने में मेधावी रहे हैं। उनका स्कूली शिक्षा दरभंगा में स्थानीय पब्लिक स्कूल से हुआ है। उन्होंने बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की डिग्री यूपीटीयू बोर्ड से प्राप्त की है। बीटेक की डिग्री उपरांत उन्होंने नौकरी का ऑफर छोड़ गेट की तैयारी शुरू की। जिसमें उन्हें सफलता मिली। जिसके बाद शेखर मणिपाल विश्वविद्यालय से एमटेक की उपाधि प्राप्त की। एमटेक की उपाधि प्राप्त करने के बाद उनके माता-पिता ने इंजीनियरिंग से उन्हें पीएचडी करने की सलाह दी। जिसके बाद वो पीएचडी में दाखिले की तैयारी में लग गये। उन्होंने कई इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय के लिये पीएचडी की पात्रता परीक्षा में भाग लिया। जिसमें उनका चयन गलगोटिया अभियंत्रण विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा व अमेटी विश्वविद्यालय, नोएडा में हो गया। गलगोटिया विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा का रिजल्ट पहले आ जाने की वजह से उन्होंने वहां पीएचडी में दाखिला ले लिया। कुछ और विश्वविद्यालय के पीएचडी पात्रता परीक्षा का रिजल्ट अभी आना बाकी है। उनका 7 रिसर्च व रिव्यू पेपर अभी तक राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
इस बाबत श्री शेखर ने बताया कि इंजीनियरिंग से पीएचडी के लिये चयनित होना हमारे लिये एक चुनौती थी, लेकिन हम चुनौती के आगे निखरते हैं, बिखरते नहीं। हमने चुनौती को स्वीकार किया और लक्ष्य को पाने के लिये संघर्ष किया। मेरे संघर्ष का मुझे सकारात्मक परिणाम मिला इसीलिए खासकर मैं इंजीनियरिंग के छात्रों से अपील करता हूँ कि थोड़ा अगर आप धैर्य रखें तो इंजीनियरिंग में पीएचडी की मंजिल पाना बहुत कठिन नहीं है। भारत सरकार भी छात्रों को इंजीनियरिंग से शोध के लिये स्कालरशिप दे रहा है। इसीलिए अर्थसंकट की बात नहीं है। भारत के नवनिर्माण के लिये इंजीनियरिंग के छात्रों को शोध की ओर आना चाहिये। खबर लिखे जाने तक डॉ० शेखर दंपत्ति को बधाई देनेवालों का तांता लगा रहा।