दरभंगा। पिछले वर्ष से ही लगातार पैट- 2019 बैच के शोधार्थियों का मांग जारी है। शोधार्थियों ने इसको लेकर कुलपति समेत तमाम अधिकारियों को 4 जनवरी 2021 को लिखित ज्ञापन भी दिया था। ज्ञापन के 7 माह बीत जाने के बावजूद भी आजतक शोधार्थियों के मांगों पर कोई रिजल्ट निकलकर सामने नहीं आ पाया। इसको देखते हुए शोधार्थियों ने कल कुलाधिपति कार्यालय को मेल के माध्यम से पुनः ज्ञापन दिया है जिसमें 4 जनवरी वाले आवेदन को भी संलग्न किया है। साथ ही विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० सुरेंद्र प्रताप सिंह, प्रतिकुलपति प्रो० डॉली सिन्हा, कुलसचिव प्रो० मुश्ताक अहमद व उप-परीक्षा नियंत्रक प्रथम (पीएच०डी०) डॉ० आनंद मोहन मिश्रा को लिखित आवेदन दिया है जिसके साथ 4 जनवरी वाले आवेदन की कॉपी भी संलग्न है।
शोधार्थियों का कहना है कि कई महीनों बीत जाने के बावजूद भी हमारी मांग को अनसुनी कर दी गयी जबकि शोधार्थियों के हित में यह अत्यंत जरूरी है। शोध की प्रक्रिया में काफी कठिनाई हो रही है। डोमेनयुक्त मेल आईडी न होने की वजह से अपने आलेखों को वे अच्छे प्रकाशन के पास नहीं भेज पा रहे हैं क्योंकि गुणवत्तापूर्ण प्रकाशन के तरफ से कहा जा रहा है कि वे विश्वविद्यालय द्वारा डोमेनयुक्त मेल आईडी से ही आलेख भेजे। ना ही शोधार्थियों को डिजिटल पहचान निर्गत किया गया है जिस वजह से शोध के लिये क्षेत्र में निकलने पर उन्हें संदेह के नजर से देखा जाता है और मारपीट का भी डर बना रहता है। साथ ही आजतक डिजिटल कोर्सवर्क प्रमाण-पत्र के दिशा में भी कोई कार्य नहीं किया गया है। इस बार भी विश्वविद्यालय हस्तलिखित कोर्सवर्क प्रमाण-पत्र निर्गत करने की तैयारी कर रही है।
इसको लेकर शोधार्थियों का एक प्रतिनिधिमंडल कल कुलाधिपति कार्यालय को मेल के माध्यम से जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन के कई अधिकारियों से मिलकर ज्ञापन सौंपा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शोध के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए शोधार्थियों की मांग मानी जाती है या फिर एक बार फिर से ठंढ़े बस्ते में डालकर अनसुनी कर दी जाती है?
शोधार्थियों के प्रतिनिधिमंडल में रघुबर प्रसाद सिंह, डॉ० चंदन ठाकुर, संजीव कुमार, अवन कुमार राय, रामनाथ शर्मा व रौशन कुमार आदि उपस्थित थे।