दरभंगा।डब्ल्यु आई टी में कोएजुकेशन के विरोध में लगातार जारी है। तमाम छात्र संगठन एबीवीपी, आइसा व संयुक्त संघर्ष मोर्चा का लगातार विरोध जारी है। सत्ताधारी दल जदयू भी इस मुद्दे पर पहले दिन से नजर बनाये हुए है। जिला परिषद उपाध्यक्ष सह जदयू नेत्री ललिता झा ने इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज करा चुकी हैं और पल-पल का रिपोर्ट ले रही हैं। इसी कड़ी में कल राजनीतिक दल प्लुरल्स का भी दौरा हुआ था। प्लुरल्स सुप्रीमों पुष्पम प्रिया चौधरी व महासचिव अनुपम सुमन खुद डब्ल्यु आई टी दरभंगा पहुंचे थे। शनिवार को जदयू जिलाध्यक्ष सह बेनीपुर के विधायक प्रो० विनय कुमार चौधरी उर्फ “अजय” ने स्वयं विश्वविद्यालय पहुंचकर संस्थान के कोएजुकेशन के विरोध में संज्ञान लिया है।
विधायक प्रो० चौधरी ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो० मुश्ताक अहमद व संस्थान के निदेशक प्रो० उमेश कुमार दास से मिलकर इस मुद्दे पर अपनी असहमति दर्ज कराते हुए कहा कि
“ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय अंतर्गत महिला प्रौद्योगिकी संस्थान (डब्ल्यु आई टी) दरभंगा की शिक्षण व्यवस्था में बदलाव न हो व डब्ल्यु आई टी दरभंगा का नाम बिहार सरकार के पोर्टल पर हो और इस संस्था में पढ़ रही लड़कियों को मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का लाभ मिले।”
ऐसा कहा जाता है कि प्रो० चौधरी जिस मुद्दे पर संज्ञान लेते हैं उसे आगाज से अंजाम तक पहुंचा कर ही दम लेते हैं। जानकारों की मानें तो उनके इस विश्वविद्यालय दौरे के बाद एक सकारात्मक उम्मीद की किरण जगी है। छात्राओं में भी हर्ष का माहौल है कि उन्हें भी अब मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना का लाभ मिल सकेगा।
अब इस मुद्दे की प्रासंगिकता को देखते हुए दरभंगा सांसद डॉ० गोपाल जी ठाकुर, शहरी विधायक संजय सरावगी, केवटी विधायक डॉ० मुरारी मोहन झा, बिहार सरकार के मंत्री जीवेश कुमार व मदन सहनी, शिक्षक कोटे से विधान परिषद डॉ० मदन मोहन झा, स्नातक कोटे से विधान परिषद सर्वेश कुमार व पूर्व विधान परिषद डॉ० दिलीप चौधरी व डॉ० विनोद कुमार चौधरी की चुप्पी तो लोगों को हैरान कर रही है।एक तरफ दरभंगा के सांसद दिल्ली में गैस पाइप लाइन की मांग कर रहें है तो दूसरी तरफ वर्षो से चल रहे संस्थान को बचाने के लिए क्यों नही आवाज उठा रहे हैं।सत्ता दल के दो दो मंत्री भी है फिर भी दरभंगा के इस धरोहर क्यों बचाने के लिए आवाज नही उठा रहें हैं।अगर ये सभी दिग्गज नेता स्वतः संज्ञान लेते तो इस मुहिम को यकीनन और बल मिलता।