दरभंगा।सांसद गोपाल जी ठाकुर ने
दरभंगा के मनीगाछी प्रखंड क्षेत्र मकरंदा गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी कंटीर झा उर्फ गांधी जी के मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हे श्रद्धांजलि दी। गांधी विचारक स्वतंत्रता सेनानी कंटीर झा उर्फ गांधी जी के मूर्ति का स्थापना एवं अनावरण प्रखंड मुख्यालय स्थित महावीर जी मंदिर के निकट किया गया है। प्रतिमा का अनावरण गांधीवादी सर्वोदय कार्यकर्ता श्री हृदय नारायण चौधरी के द्वारा किया गया है।
सांसद श्री ठाकुर ने कहा कि स्वर्गीय कंटीर झा ,गांधी जी के नाम से भी लोकप्रिय थे। उन्हें आंदोलनात्मक क्रियाकलाप के लिए कुल 75 वर्षों की सजा मिली थी ।
सांसद ने कहा कि दरभंगा जिला के मकरंदा ग्राम में 1885ई. में कंटीर झा का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। ये बचपन से ही क्रान्तिकारी विचार के थे।13 अप्रैल 1919 वैशाखी के दिन अमृतसर में हुए जालियांवाला बाग नरसंहार कांड ने इन्हें झकझोर दिया।ये अगस्त 1920 के असहयोग आंदोलन में घर परिवार की परवाह किए बिना आंदोलन में कूद पड़े थे ।मनीगाछी पोस्ट ऑफिस को जलाया वौहरवा पुल एवं बलवा पुल को तोड़ा । मनीगाछी रेलवे स्टेशन पर छापा दिया ,गांव गांव में क्रांति की लहर फैलाई, इन्हे कई बार गिरफ्तार कर अंग्रेजों द्वारा यातनाएं दी गई थी। स्वतंत्रता आंदोलन के समय विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कई बार जेल गए थे। इनकी देशभक्ति और निर्भीकता का अंदाजा इसी बात से प्रदर्शित होता है की केस की सुनवाई के दौरान इन्होंने अपनी सफाई में जज को कहा तुम्हारी कलम में जितनी ताकत है ,सजा दे दो।
सांसद श्री ठाकुर ने कहा कि इन्होंने जत्था बनाकर सदाकत आश्रम में झंडा फहराने का कार्य किया था । उन्होंने कहा कि इनके द्वारा 10 दिसंबर 1929 को मनीगाछी रेलवे स्टेशन से पूरब में विशाल गाछी प्रांगण में राजेंद्र प्रसाद की बैठक करवाई गई थी और उनके परामर्श से पांच आश्रम बनाए गए थे। सरिसव पाही में कर्मवीर आश्रम, भैरव स्थान में धर्मवीर आश्रम, झंझारपुर में स्वराज आश्रम, बहेरा में कांग्रेस कमेटी का नाम ब्रह्म आश्रम रखा गया ।
सांसद ने कहा कि 1934 में कंटीर झा जी द्वारा मनीगाछी में गांधी जी आश्रम स्थापित किया गया था। इनके सादा वेशभूषा, खानपान, आचार विचार ,जनसेवा तथा सच्चरित्रता के कारण इन्हें गांधीजी नाम से संबोधित किया जाने लगा और यह दरभंगा जिला के गांधीजी उपनाम से विभूषित हुए । ये आज के नौजवानों के लिए प्रेरणाश्रोत है। उन्होंने कहा कि नमक आंदोलन के बाद से ही इन्होंने आजीवन नामक खाना ही छोड़ दिया था। 101वर्ष की उम्र में 16नवंबर1986 को परलोक सिधार गए । ऐसे वीर सपूत पर मिथिला सहित संपूर्ण देश को नाज है।
इस दौरान भाजपा पश्चिमी मंडल अध्यक्ष रजनीश झा,मदन कुमार यादव,अशोक चौधरी,प्रवीण मिश्रा, श्रवण झा सहित कई भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे।