दरभंगा: मंगलवार को स्थानीय महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय, दरभंगा में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज चौधरी के सेवानिवृत्ति के मौके पर प्रधानाचार्य प्रो. मो. रहमतुल्लाह की अध्यक्षता में सम्मान सह विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर मिथिला के पारंपरिक पाग, चादर व गुलदस्ता देकर उन्हें सम्मानित किया गया।
इस मौके पर प्रधानाचार्य प्रो. मो. रहमतुल्लाह ने कहा कि आज का पल हमारे लिये काफी भावुक पल है। आज महाविद्यालय परिवार की करीब चार दशकों से अंग रही बिहार की प्रख्यात समाजशास्त्री डॉ. सरोज चौधरी सेवानिवृत्त हो रही हैं। अध्ययन-अध्यापन के प्रति डॉ. चौधरी का सदैव से ऐसा लगाव रहा कि छात्र-छात्रा उन्हें काफी पसंद करते आ रहे हैं। उनके व्यक्तित्व व कृतित्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बड़े राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने के बावजूद भी आज तक उन्होंने कभी अपने रुतबे का धौंस नहीं दिखाया बल्कि उन्होंने शिक्षक धर्म का पूरे कर्तव्यपरायणता के साथ निर्वाह किया है। उनकी अनवरत सहजता, शालीनता, विनम्रता व विद्वता का महाविद्यालय परिवार सम्मान करता है और उनके स्वस्थ, दीर्घायु व सदैव प्रसन्नचित रहने के लिये अल्लाह-ताला से इबादत करता है।
पूर्व प्रधानाचार्य सह इंग्लिश विभागाध्यक्ष प्रो. परवेज अख्तर ने कहा कि शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता है। शिक्षक के सानिध्य में तो पग-पग ज्ञान की ही मोती मिलती है। डॉ. चौधरी आज सेवानिवृत्त हो रही हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 38 सालों तक अपना अमूल्य योगदान दिया है। छात्र हित के लिये वो सदैव तत्पर दिखती थी। अपने मृदुभाषिता, मिलनसारिता व सहनशीलता को ले शैक्षणिक जगत में जानी जाती है। हम उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
महाविद्यालय के बर्सर सह भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. शम्से आलम ने कहा कि मैडम के साथ दो-दो महाविद्यालयों में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ। करीब चार दशकों की इस अवधि में एक भी दिन यह नहीं देखा कि वो महाविद्यालय एक भी मिनट के विलंब से पहुंची बल्कि झुमक महिला धर्म प्रिय लाल महाविद्यालय, मधुबनी से लेकर महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय तक वो ससमय या यूं कहें कि समयपूर्व महाविद्यालय पहुंच जाती थी। ये उनके शैक्षणिक अनुशासन व बेहतर कार्यशैली का परिचायक है। अपने नियमित वर्ग संचालन को ले छात्र-छात्राओं में उनके प्रति सदैव से एक क्रेज रहा। आज सेवानिवृत्त होकर जीवन की अगली पारी वो शुरू कर रही हैं। हम उनके आगामी जीवन की शुभकामनाएं व बेदाग सेवानिवृत्ति के मौके पर बधाई प्रेषित करते हैं।
अंत में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज चौधरी ने अपने भावुक संबोधन में कहा कि आज मैं अपने सेवा से 38 सालों के शैक्षणिक सफर को पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो रही हूं। विश्वविद्यालय व महाविद्यालय परिवार के सहयोग के बिना किसी भी उपलब्धि की बात करना बेमानी होगा क्योंकि कोई भी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय टीम वर्क से ही बेहतर परफार्मेंस करता है। मेरी सदैव से कोशिश रही कि मैं जहां जिस महाविद्यालय में रहूं, वहां सर्वश्रेष्ठ योगदान दूं। आपलोगों ने जो सदैव सहयोग व सम्मान दिया, उसका मैं सदैव ऋणी रहूंगा। बस जाते-जाते यही कहना चाहूंगा कि अगर जाने-अनजाने में मेरी किसी बात से किसी भी शिक्षक या कर्मी का भावना कभी आहत हुआ हो तो वो माफ करना चाहेंगे। आगे भी महाविद्यालय परिवार को मेरी जरूरत महसूस हो तो वो मुझे बेहिचक याद करें। मैं महाविद्यालय परिवार के साथ सदैव खड़ा हूँ। अंत में जाते-जाते उनकी आंखें नम हो गयी और भावुक हो कहा कि आज विदाई की इस वेला में सब कुछ होते हुए भी मेरे पास कुछ नहीं है। आज सिर्फ इस बात का मलाल है कि काश आज के दिन मेरे पति पूर्व विधानपार्षद स्व. प्रो. विनोद कुमार चौधरी मेरे साथ होते।
इस मौके पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मियों के साथ-साथ उनकी छोटी बेटी सह प्लुरल्स सुप्रीमों पुष्पम प्रिया चौधरी, प्लुरल्स महासचिव अनुपम सुमन समेत दर्जनों छात्र-छात्रा उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। छात्र-छात्राओं ने भी डॉ. चौधरी के साथ क्लास में बिताये हुए पल की बारी-बारी से चर्चा की।
ज्ञात हो डॉ. चौधरी पूर्व विधानपार्षद सह मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष सह पूर्व समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष दिवंगत प्रो. विनोद कुमार चौधरी की पत्नी हैं।

