लौहपुरुष के रूप में सरदार पटेल व आयरन लेडी के रूप में इंदिरा गांधी सदैव याद किये जायेंगे याद: प्रो. मुनेश्वर यादव।

लौहपुरुष के रूप में सरदार पटेल व आयरन लेडी के रूप में इंदिरा गांधी सदैव याद किये जायेंगे याद: प्रो. मुनेश्वर यादव।

दरभंगा: मंगलवार को विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती व पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव की अध्यक्षता में मनाया गया। सभी शिक्षकों व उपस्थित छात्र-छात्राओं व शोधार्थियों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण करते हुए पुष्प अर्पित किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष प्रो. मुनेश्वर यादव ने कहा कि आज ही के दिन सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म हुआ था। सरदार पटेल के बिना हिंदुस्तान के मौजूदा मानचित्र का कामना करना बेमानी होगा। सरदार पटेल गृहमंत्री रहते हुए जिस प्रकार सभी देशी रियासतों को भारत में मिलाने का काम किया। उसी का प्रतिफल है कि उनके जन्म जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। उधर इंदिरा गांधी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के रुप में देश को एक मजबूत नेता मिला। इंदिरा जी के द्वारा लागू आपातकाल वैसे विस्तार से प्रकाश डालने का विषय है लेकिन आपातकाल में इंदिरा जी देशहित में कई साहसिक फैसला लिया। चाहे इंडिया के तरक्की के लिये उद्योग के विस्तार का विषय हो, हरित क्रांति का विषय हो या परिवार नियोजन का विषय हो। उन्होंने मजबूती से फैसला लिया और उसे अमलीजामा पहनाया। बंगलादेश को पाकिस्तान से मुक्त करा एक अलग राष्ट्र घोषित कराने में भी उनकी अहम भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। लौहपुरुष के रूप में सरदार पटेल व आयरन लेडी के रूप में इंदिरा गांधी सदैव याद किये जायेंगे। मैं सरदार पटेल के जयंती व इंदिरा जी की पुण्यतिथि पर उन्हें सादर नमन करते हुए अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करता हूँ।

मिथिला विश्वविद्यालय के उप-परीक्षा नियंत्रक(तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा) सह विभाग के युवा व्याख्याता डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि बिना एक बूंद खून गिराये सारे भारत को एक करनेवाले महान राजनेता के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल जाने जाते हैं। हैदराबाद का निजाम हो या जूनागढ़ उन्होंने अपने शौर्य व पराक्रम से 562 रियासतों को हिंदुस्तान में मिला दिया। यही कारण है कि राष्ट्र उन्हें बिस्मार्क और लौहपुरुष के रूप में पूजता है और उनके जन्मजयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाता है। वहीं इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि इंदिरा गांधी सिर्फ राष्ट्र की ही नहीं बल्कि विश्व की नेता थी। इंदिरा जी ने अपने कार्यकाल में यह साबित कर दिया कि वो सिर्फ परिवारवाद से ऊपजी रिमोट कंट्रोल से चलने वाली प्रधानमंत्री नहीं है बल्कि उनमें राष्ट्र के नेतृत्व करने की काबिलियत कूट-कूट कर भरी हुई है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि इंदिरा जी ने कुछ विवादित निर्णय भी लिया जिसमें आपातकाल सरीखे कई महत्त्वपूर्ण है लेकिन उनके पूरे जीवन पर प्रकाश डालें तो पता चलेगा कि इंडिया को विश्वपटल पर उभारने में भी उन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। बंगलादेश को पाकिस्तान से मुक्त कराने के लिये उनका पराक्रम जगजाहिर है। 31 अक्टूबर 1984 का वो मनहूस दिन जिस दिन राष्ट्र उदयगामी भास्कर को एक तरफ अर्घ्य देकर घर लौट ही रहा था कि यह खबर मिली कि उनके ही अंगरक्षक बेअंत सिंह व सतवंत सिंह ने प्रधानमंत्री आवास के लॉन में टहलते समय उन्हें गोलियों से भून डाला। जिसमें उनकी मृत्यु हो गयी। अंत में उन्होंने सरदार पटेल व इंदिरा गांधी की भारत के परिपेक्ष्य में बताते हुए कहा कि सरदार पटेल व इंदिरा गांधी दोनों अपने-अपने समय में राष्ट्र को मजबूती प्रदान किया। अगर सरदार पटेल व इंदिरा कुछ वर्ष और जीवित होते तो हिंदुस्तान अपने उच्चतम शिखर पर होता। हम दोनों राजनेताओं को अपनी ओर से श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

इस अवसर पर विभाग के रघुवीर कुमार रंजन, गंगेश कुमार झा, दिनेश कुमार व संजय सुमन, राम कृपाल ,जितेन्द्र कुमार सहित सैकड़ों छात्र-छात्रा व शोधार्थी उपस्थित थे।

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