दरभंगा: सोमवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग में ‘जखन-तखन’ व्याख्यानमाला का दसवाॅं व्याख्यान ‘मिथिलामे भूमि संघर्ष’ विषय पर बीएन मंडल विवि के मैथिली विभाग के स. प्राध्यापक डा कमल मोहन चुन्नू ने दिया।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचीन इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. अमीर अली खान ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ साहित्यकार विभूति आनंद ने वक्ता की औपचारिक परिचय से किया एवं पूर्व की भांति सम्मान समारोह सम्पन्न हुआ।
व्याखान प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ता डा चुन्नू ने संपूर्ण भूमि संघर्ष के पृष्ठभूमि को स्थापित करते हुए मिथिला में भूमि संघर्ष के ऊपर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि- “कांग्रेस जमींदारों के पक्ष की पार्टी थी। यहां तक की महात्मा गांधी ने भी किसानों पर कभी खुल के वक्तव्य नहीं दिया भले ही उन्होंने नीलहा आंदोलन में चंपारण आए और इस समस्या पर सरकार से संघर्ष किया। प्रतिफल अनुकूल हुआ, किंतु कभी भी गांधीजी किसानों के पक्ष में उनकी समस्याओं को लेकर मुखर नहीं हो पाए। वामपंथी रुझान के लोगों ने भूमि संघर्ष को एक जमीन दिया, जिसके माध्यम से मिथिला में भूमि संघर्ष की शुरुआत हुई थी। अन्हरी महंथ, सेलीबेली, मस्सा मिर्जापुर, पोखरौनी, भट्टशिमर सहित कई जगह हैं, जहां भूमि संघर्ष शुरू हुआ था और मजदूरों की हत्याएं भी हुई थी। इसके प्रभाव दूरगामी हुए, इन्हीं बिंदुओं को रेखांकित करते हुए संपूर्ण मिथिला के भूमि संघर्ष को उन्होंने व्याख्यान के दौरान प्रस्तुत किया।
अध्यक्षीय संबोधन में डाॅ. खान ने कहा की- “भूमि संघर्ष की बुनियाद औपनिवेशिक काल में ही पर गई थीं जिसका विस्तार स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के उपरांत सतत चलता रहा।”
साहित्यकार विभूति आनंद ने संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन किया। इस क्रम में उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि आगामी व्याख्यान का विषय ‘मिथिला की नाट्य परम्परा’ होगा।
इस मौकै पर प्रो. भीमनाथ झा, प्रो विद्या नाथ झा, डाॅ. मुरलीधर झा, डाॅ. भक्तिनाथ झा, डा अवनींद्र कुमार झा, डाॅ. प्रतिभा किरण, डाॅ. मनीष कुमार, डा सुशांत कुमार, श्री अमल झा, डाॅ. सुनीता कुमारी, डा सुनीता झा, डा सत्येंद्र कुमार झा, मुरारी कुमार झा, पूर्णिमा कुमारी, पुष्पांजली कुमारी, रश्मि कुमारी, सिद्धी सुमन, हेमा कुमारी, राज्यश्री, प्रियंका, अम्बालिका, राजनाथ, शिवम, बंदना समेत विश्वविद्यालय के दर्जनों शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

