हाजीपुर को लेकर चाचा-भतीजा में जुबानी जंग, पारस बोले- जनता ने आशीर्वाद दिया, सीट छोड़ने का सवाल नहीं।

पटना: बिहार में हाजीपुर लोकसभा सीट के लिए चाचा और भतीजे के बीच एकबार फिर से तलवारें तन गई हैं। हाजीपुर को लेकर लोजपा (रामविलास) और लोजपा (पारस) के अंदर ही उथल-पुथल मची हुई है। जहां पशुपति पारस इस सीट पर अपना दावा ठोक रहे हैं तो वहीं रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान भी इस सीट को लेकर अंदर ही अंदर तैयारी कर रहे हैं।

चिराग ने जहां अपने चाचा के संसदीय सीट पर ही निशाना साध लिया है तो चाचा पशुपति पारस भी भतीजे चिराग के लिए यह सीट छोड़ने में मूड में नहीं दिख रहे हैं। इसी कड़ी में अब पशुपति पारस ने कहा है कि हाजीपुर के लोगो का आशीर्वाद मेरे साथ है। यहां के लोगों ने ही मुझे मंत्री बनवाया है।

लोजपा (पारस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति पारस ने कहा कि हाजीपुर सांसद पहले मेरे बड़े भाई साहब थे। जब वो राज्यसभा के सदस्य हो गए और लोकसभा का चुनाव हुआ तो उन्होंने मुझको अधिकृत किया। मैं उस समय बिहार सरकार का मंत्री था। लेकिन उन्होंने कहा कि पारस हाजीपुर हमारी मां है, हमारा कर्म भूमि है। हम अब नहीं रहेंगे हमारी अनुपस्थिति में हाजीपुर की जनता का सेवा करना। उसी संकल्प के साथ में हाजीपुर से चुनाव लड़ा और हाजीपुर की जनता ने मुझे अपना आशीर्वाद दिया।

पारस से जब यह सवाल किया गया कि हाजीपुर सीट को लेकर चिराग पासवान भी अपना दावा ठोक रहे हैं। वह कह रह हैं कि यह सीट उनके पिता रामविलास पासवान की सीट रही है। यहां की जनता ने उनको अपार प्रेम दिया है, अब वो लोग मुझे अपने बेटे की तरह आशीर्वाद देंगे।

इसके जवाब में पारस ने कहा कि मुझे इस विषय पर कोई भी कमेंट नहीं करना है। बस हाजीपुर की जनता ने मुझे पहली बार के लोकसभा चुनाव में जीत दिलवाया और उनके ही आशीर्वाद से मंत्री बना हूं, आगे भी उनका आशीर्वाद मेरे साथ रहेगा।

बता दें कि बिहार में लोकसभा की 6 आरक्षित सीट है। जिसमें हाजीपुर, जमुई और समस्तीपुर सीट पर रामविलास पासवान के परिवार वालों का कब्जा है। फिलहाल पशुपति पारस हाजीपुर से सांसद है और भाजपा में शामिल होकर केंद्र में मंत्री है। लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि इस सीट को लेकर चिराग पासवान भी एनडीए के संपर्क में हैं और सीट शेयरिंग के फार्मूले में चिराग अपने पिता की परंपरागत सीट हाजीपुर की मांग पर अड़े है।

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