वेद-संस्कृत विद्यालयों को भारत सरकार की स्वीकृति, शिक्षकों को अब बिना बीएड मिलेगी नौकरी
पटना । भारत सरकार ने वेद और संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद संस्कृत शिक्षा बोर्ड, उज्जैन के अंतर्गत संचालित वेद-संस्कृत विद्यालयों को अब भारत सरकार की औपचारिक स्वीकृति मिल गई है। साथ ही इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को वेतन भुगतान भी सरकार द्वारा किया जाएगा।
इस आशय की जानकारी राष्ट्रीय महासंघ वेद संस्कृत विद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम चरित्र प्रसाद यादव ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री लोक शिकायत कार्यालय, नई दिल्ली द्वारा पत्रांक संख्या PMOG/DI 2025/0037128 दिनांक 25 फरवरी 2025 और शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा पत्रांक संख्या 4-1/2024 Skt.I दिनांक 12 अगस्त 2025 को यह आदेश जारी किया गया है।
राम चरित्र प्रसाद यादव ने बताया कि इस निर्णय के बाद अब किसी भी विषय से स्नातक (बी ए) या परास्नातक (एम ए) उत्तीर्ण युवक-युवतियाँ वेद-संस्कृत विद्यालयों में शिक्षक नियुक्त हो सकेंगे, चाहे उन्होंने बीएड किया हो या नहीं। शिक्षक बनने के लिए केवल चार से पाँच वर्षों का शिक्षण अनुभव प्रमाणपत्र किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय या महाविद्यालय से आवश्यक होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद प्रतिष्ठान, उज्जैन को इस आशय का पत्र भेज दिया गया है और संबंधित विद्यालयों को शीघ्र ही वेतन भुगतान प्रारंभ होगा।
यह निर्णय उन हजारों युवाओं के लिए आशा की नई किरण लेकर आया है जो वेद एवं संस्कृत शिक्षा क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, लेकिन शैक्षिक अर्हताओं की जटिलताओं के चलते अब तक अवसर से वंचित थे।

