दरभंगा। बिहार सरकार के द्वारा प्रारम्भिक विद्यालयों एवं माध्यमिक उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानध्यापक के पद पर प्रत्यक्ष परीक्षा लेकर बहाली करने के आदेश का टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट ने विरोध किया है। संघ ने 2012 एवं 2020 नियमावली के तहत अंकित प्रवधानों के अनुकूल 5 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके स्नातक ग्रेड के शिक्षकों की पदोन्नति प्रधानध्यापक के पद पर करने की मांग की है। संघ के प्रवक्ता धनंजय झा ने बताया कि इससे पहले भी जब जब टीईटी शिक्षको को उनका समुचित अधिकार देने की बात आई है सरकार सदैव ही उन्हें ठगती रही है। बिहार के बाहर जहां उन्हें वे सभी सुविधाएं देय है जो पुराने शिक्षकों को मिलती है तो दूसरी ओर बिहार में जो अधिकार मिलने भी वाला होता है उसमें सरकार अड़चन डाल देती है। चाहे मुद्दा सीआरसीसी का हो बीआरपी का या फिर अब प्रधानाध्यापक का सरकार हमेशा ही नई चाल चलकर टीईटी शिक्षकों को उससे वंचित रखती है। श्री झा ने प्रधान शिक्षक के योग्यता में डी एल एड नहीं जोड़ने को भी सरकार की मनमानी बताया है.वही संघ के जिला कार्यकारिणी सदस्य सोनू मिश्रा ने बताया कि जब शिक्षक नियमावली 2020 में यह प्रावधान पहले से अंकित है तो फिर यह परीक्षा की बात कहा से उठने लगी। सरकार अगर परीक्षा ही लेना चाहती है तो ले लेकिन पदोन्नति के लिए नही बल्कि सहायक शिक्षक के लिए। लेकिन उसकी मंशा साफ नही दिख रही है। वह शिक्षकों को उलझाए रखना चाहती है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखने की साजिश करती है। अगर जल्द ही सरकार अपने निर्णय को वापस नही लेती है तो संघ चुप्प नही बैठेगा।