राष्ट्रपति के द्वारा श्रेष्ठ दिव्यांगजन पुरस्कार से अलंकृत हुई ज्योति सिन्हा।

राष्ट्रपति के द्वारा श्रेष्ठ दिव्यांगजन पुरस्कार से अलंकृत हुई ज्योति सिन्हा।

दरभंगा: आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच एवं सृजनात्मक सरोकार के पक्षधर के लिए कोई काम कठिन नहीं होता है। वह निरंतर ऊंचाई को प्राप्त करता है। ऐसी ही है बिहार की एक बेटी ज्योति सिन्हा जिन्होंने मिथिला लोक चित्र के माध्यम से ऐसी उच्चता प्राप्त की जिसकी वह हकदार है। यही कारण है कि ज्योति सिन्हा राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित की गई।

3 दिसंबर 2023को विश्व विकलांगता दिवस के अवसर पर ज्योति को राष्ट्रपति के द्वारा श्रेष्ठ दिव्यांगजन पुरस्कार प्राप्त हुआ ।इस वर्ष बिहार की इस अकेली बेटी ने यह पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किया है। यह पुरस्कार मिथिला लोक चित्र में अद्वितीय एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रदान किया गया है ।बिहार वासियों के लिए यह गौरव की बात है।

ज्योति बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के चंगेल गांव की निवासी है। इनके पिता वीरेंद्र कुमार लाल एक किसान है। चूंकि ज्योति मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी संगीन बीमारी से ग्रसित हो गई। इसलिए उनके पिता और भाई अधिक समय उसकी देखभाल में बिताते हैं। दुर्भाग्यवस ज्योति के जुड़वा भाई भी 2005 में इसी बीमारी से

ग्रसित हो गए। परिवार में यह समय घोर संकट का रहा।

पढ़ने में रुचि रखने वाली सुश्री ज्योति की पढ़ाई 2002 के उपरांत बंद हो गई लेकिन 10 वर्षों के पश्चात पुन:उन्होंने बिलट महथा आदर्श महाविद्यालय ,बहेरी में अंतरस्नातक कक्षा में नामांकन लिया। स्नातक की परीक्षा भी उन्होंने इसी संस्थान से दी और उत्तीर्णता प्राप्त की। सीएम आर्ट्स कॉलेज, दरभंगा से स्नातकोत्तर हिंदी में उत्तीर्ण हुई ।संप्रति विश्वविद्यालय हिंदी विभाग( ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वरनगर ,दरभंगा) में शोध कार्य में संलग्न है। सुश्री सिन्हा अपनी सफलता में अपने माता-पिता और भाई के अलावा चित्रकला और

साहित्य में स्वर्गीय कृष्ण कुमार कश्यप और प्रोफेसर उमेश कुमार उत्पल को अपना आदर्श मानती है।

सुश्री ज्योति सिन्हा चित्रकला में अपनी प्रतिभा के बल पर 2016 एवं 2017 में भी राजकीय पुरस्कार और राजकीय कला पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है ।ज्योति घर पर रहकर भी अपने ग्रामीण लड़कियों को मिथिला लोकचित्र कला में नि:शुल्क प्रशिक्षण देती है।

बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा कहते हैं “ज्योति ने यह साबित कर दिखाया है कि जिद और जुनून से जिंदगी में हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। इसमें दिव्यांगता भी आरे नहीं आती।”

शारीरिक अक्षमता के बावजूद ज्योति ने कभी हौसला नहीं छोरा ,कभी निराश नहीं हुई। एक से एक बाधाआई लेकिन अपने आत्मविश्वास के बल पर वह उच्चता का यह मुकाम हासिल किया है। देश की बेटियों के लिए ज्योति प्रेरणा है।

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