मुंह में गोली लगने के बाद सफल ऑपरेशन, पारस ग्लोबल हॉस्पिटल में मिली नई जिंदगी
* डॉक्टरों ने स्पाइनल कॉर्ड से सुरक्षित निकाली बुलेट, लिप-टंग और जबड़े का भी किया पुनर्निर्माण
* जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे युवक को डॉक्टरों ने नया जीवन दिया
दरभंगा।
मुंह में गोली लगने के बाद जिंदगी से जूझ रहे सिंहवाड़ा के एक ज्वेलरी दुकानदार की जान पारस ग्लोबल हॉस्पिटल, दरभंगा ने बचा ली। मरीज को बदमाशों ने बेहद नजदीक से मुंह में गोली मार दी थी, जो गाल और जीभ को चीरती हुई गर्दन की रीढ़ (स्पाइनल कॉर्ड) में जा फंसी थी। हालत नाजुक थी। अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. रविन्द्र कुमार गुप्ता ने जटिल सर्जरी कर न सिर्फ बुलेट को सुरक्षित निकाला, बल्कि चेहरे और जबड़े की संरचना को भी दोबारा बनाया। आज मरीज स्वस्थ होकर दोबारा अपने काम पर लौट चुका है।
डॉक्टरों के अनुसार, गोली बायीं ओर के होंठ (लिप) को चीरती हुई मुंह, जीभ और गर्दन को नुकसान पहुंचाती हुई स्पाइनल कॉर्ड में जाकर फंस गई थी। यह अत्यंत जटिल स्थिति थी, लेकिन चिकित्सकीय कौशल के बल पर डॉक्टरों ने बुलेट को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ होंठ, जीभ और जबड़े का पुनर्निर्माण भी किया। ऑपरेशन के सात दिन बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई। डॉ. रविन्द्र कुमार गुप्ता ने बताया मरीज अब ठीक हैं और किसी तरह का कोई कंप्लिकेशन नहीं है।
पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल के जोनल डायरेक्टर डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मरीज की जान समय पर इलाज मिलने के कारण बचाई जा सकी। उन्होंने बताया कि मिथिला क्षेत्र के चार जिलों में 24×7 इमरजेंसी सुविधा पारस ग्लोबल हॉस्पिटल में ही उपलब्ध है। डॉक्टरों की सूझ-बूझ और आधुनिक संसाधनों के कारण ही अब वह मरीज दोबारा अपने सामान्य जीवन में लौट चुके हैं और दुकान पर बैठने लगे हैं।
100 बिस्तरों वाले पारस ग्लोबल दरभंगा में एक ही स्थान पर सभी चिकित्सा सुविधाएं हैं। हमारे पास एक आपातकालीन सुविधाए उच्च योग्य और अनुभवी डॉक्टरों के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा केंद्र है। पारस इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर बिहार में अपनी विशेषज्ञताए बुनियादी ढांचे और व्यापक कैंसर देखभाल प्रदान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के लिए प्रसिद्ध है।

