मिथिला ही नहीं वरन राष्ट्र के नेता थे ललित नारायण मिश्र:- प्रधानाचार्य, प्रो० परवेज अख्तर

दरभंगा । महारानी कल्याणी महाविद्यालय, लहेरियासराय, दरभंगा में पूर्व कैबिनेट मंत्री सह मिथिला विश्वविद्यालय के संस्थापक स्व० ललित नारायण मिश्रा की 48 वीं पुण्यतिथि मनाई गई। प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षकों ने उनके तस्वीर पर माल्यार्पण कर अपनी-अपनी ओर से श्रद्धांजलि व्यक्त की।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रधानाचार्य प्रो० परवेज अख्तर ने कहा कि शत-शत नमन उनको, वो एक इंसान ही नहीं खुद में एक दर्शनशास्त्र थे। सदियों बीत जाती है तब जाकर कहीं ललित बाबू जैसा एक अनमोल रत्न मिलता है, इस माँ भारती को। ललित बाबू एक सुलझे हुए राजनीतिज्ञ ही नहीं बल्कि दूरगामी व बहुआयामी सोच के धनी व्यक्तित्व थे। उनमें मिथिला ही नहीं, बिहार ही नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का विजन था। जिस कारण से वो पूरे देश में खासे लोकप्रिय थे। वो लोकसभा व राज्यसभा के सांसद के साथ-साथ संसदीय सचिव, उप मंत्री, राज्य मंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में विभिन्न मंत्रालयों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। मिथिला विश्वविद्यालय उनके विजन का परिणाम है जिसमें उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। कोसी में नहर प्रणाली उनके विजन का ही परिणाम रहा। नहर निर्माण में उन्होंने भारत-नेपाल के बीच सेतु की भूमिका निभाया। सैकड़ों सूती मिल के अधिग्रहण में उन्होंने अहम योगदान दिया। कई रेल लाइनों का उन्होंने मिथिला को सौगात दिया। दुर्भाग्यवश 2 जनवरी 1975 को समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर समस्तीपुर-मुजफ्फरपुर बड़ी रेल लाइन के उद्घाटन के दौरान उन पर बम फेंका गया, जिसमें वो बुरी तरह घायल हो गये और अगले दिन 3 जनवरी 1975 को उनकी असमय मृत्यु हो गयी। आज भी मंच पर कहा गया उनका अंतिम लाइन याद आता है तो सारा रोम-रोम खड़ा हो जाता है कि मैं रहूं या ना रहूं बिहार बढ़कर रहेगा।
इस मौके पर महाविद्यालय के भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ० शम्से आलम सहित सभी शिक्षकों ने भी अपनी-अपनी बातें रखी और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस दौरान सभी विभागों के विभागाध्यक्ष सहित विभागीय शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मी व छात्र-छात्रा उपस्थित थे।

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