मधुबनी की सुभद्रा देवी को मिला पद्मश्री पुरस्कार, कला के मुरीद हुए PM नरेन्द्र मोदी, सीखने की जताई इच्छा सुभद्रा देवी मधुबनी जिला के पंडोल प्रखंड के सलेमपुर गांव की रहने वाली हैं. बचपन से ही वह अपने गांव के लोगों को पेपरमेशी कला को बनाते हुए देखकर वह भी सीखने लगी. पिछले दिनों राष्ट्रपति भवन में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए लोगों को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया. इसमें 87 वर्षीया पेपरमेशी कला की सिद्धहस्त सुभद्रा देवी भी शामिल थीं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुभद्रा देवी कहां की रहने वाली हैं और इस कला को देश-दुनिया में आगे बढ़ाने का उनका सफर कैसा रहा है. यही नहीं, पद्मश्री से सम्मानित होने वाली सभी हस्तियों से जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत की तो उन्होंने खुद भी सुभद्रा देवी से पेपरमेशी कला सीखने की इच्छा जाहिर की.दरअसल, सुभद्रा देवी मधुबनी जिले के पंडोल प्रखंड सलेमपुर गांव की रहने वाली हैं. पद्मश्री अवार्ड मिलने के बाद सुभद्रा देवी तो प्रसन्न हैं ही, साथ ही जिले को भी गौरवान्वित होने का अवसर मिला है. बचपन से लग गई थी सीखने की आदतसुभद्रा देवी बताती हैं कि उन्हें बचपन में पढ़ाई में उतना मन नहीं लगता था. इस दौरान वह अक्सर गांव के साथ-साथ अन्य लोगों को पेपरमेशी कला करते देखती थीं. इससे उनका झुकाव भी इस कला को सीखने की ओर होने लगा. धीरे-धीरे वह भी सीखने काप्रयास करने लगी. धीरे-धीरे उन्हें भी पेपरमैशी के प्रति लगाव बढ़ने लगा. इसके बाद से वह अबतक पेपरमेशी करना जारी रखी हुई हैं. यह पैशन के साथ उनका प्रोफेशन भी बन गया. आज वह पिछले 62 साल से इस कला को देश-दुनिया में स्थापित किए हुए हैं. पेपरमेशी कला में इकलौती महिला को मिला यह है सम्मान कियाबता दें कि सुभद्रा देवी पेपरमेशी कला में इकलौती महिला हैं, जिन्हें पद्मश्री सम्मान दिया गया. वह बताती हैं कि इस कला की वजह से उन्हें पहली बार 1980 में राज्य सरकार के उद्योग विभाग और 1991 में केंद्र सरकार द्वारा सम्मानित किया गया था. सुभद्रा देवी ने पेपरमेसी को अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया, जिसके कारण उन्हें काफी सम्मान मिला. उन्होंने न सिर्फ कला को समृद्ध किया, बल्कि 100 से अधिक महिलाओं को सिखाया भी. ताकि उनके बाद भी यह कला जीवित रहे और आय भी हो. PM ने जताई सीखने की इच्छासुभद्रा देवी बताती हैं कि बुधवार की शाम को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों उन्हें पद्मश्री से समानित किया गया. इस दौरान राष्ट्रपति ने उन्हें प्रशस्ति पत्र, मेडल व प्रमाण पत्र प्रदान किया. साथ ही समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ने उनसे कुशलक्षेम पूछते हुए पेपरमेशी कला पर बातचीत की और सीखने की इच्छा जाहिर की.
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