दरभंगा। बीपीएससी 2014 बैच के आने के बाद लगातार विश्वविद्यालय कैंपस का शैक्षणिक माहौल में दिन-प्रतिदिन सकारात्मक बदलाव आ रहा है। ज्ञात हो कि बीपीएससी 2014 बैच से बिहार को गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की एक सीरीज मिली है। जो अपने ज्ञान के साथ-साथ लेटेस्ट टेक्नोलॉजी व देश-दुनिया से जुड़कर सदैव अपडेट है। जिसका प्रत्यक्ष फायदा विश्वविद्यालय कैंपस में स्नातकोत्तर में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं व शोधार्थियों को मिल रहा है।
इसी कड़ी में बीपीएससी 2014 बैच के विश्वविद्यालय भूगोल विभाग के शिक्षक डॉ० गौरव सिक्का का शोध-पत्र रूटलेज पब्लिकेशन (टेलर एंड फ्रांसिक इंटरनेशनल ग्रुप) के जेंडर, प्लेस एंड कल्चर (ए जर्नल ऑफ फेमिनिस्ट ज्योग्राफी) अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्र में प्रकाशित हुआ है। इस जर्नल का इम्पैक्ट फैक्टर थॉमसन रियूटर्स के अनुसार 2 से ऊपर है। इनके शोध का विषय “डैम इंड्यूस्ड डिस्प्लेसमेंट एंड रिसेटेलमेंट एंड मैस्क्युलिनिटीइस : केस ऑफ इंडिया एंड मलेशिया” है। इस शोध में उन्होंने भारत और मलेशिया के परिपेक्ष्य में इस तथ्य का शोध किया है कि सरदार सरोवर बांध एवं मलेशिया के कई और महत्वपूर्ण बांध बनने से वहां जो विस्थापन और पुनर्स्थापन का कार्य हुआ उससे वहां के पुरुष व महिलाओं के घरेलू व सामाजिक परिवेश पर क्या प्रभाव पड़ा है। उन्हें किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। डैम की वजह से उनके जीवन पर किस तरह से भौगोलिक एवं सामाजिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है। उनका खानपान, रहनसहन, संसाधन व सोच तक पर असर पड़ा है। ओवरऑल कहें तो बड़े डैम के वजह से भारत और मलेशिया में डैम किनारे स्थापित समाज के पुरुषों पर सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव का पूरा अध्ययन इस अंतर्राष्ट्रीय शोध-पत्र में प्रकाशित है। यह जर्नल भूगोल विषय में “ह्यूमेन व सोशल ज्योग्राफी” के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी व प्रतिष्ठित जर्नल में से एक है। डॉ० सिक्का के इस अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में छपे शोध-पत्र से मिथिला विश्वविद्यालय का नाम एक बार पुनः शैक्षणिक जगत में वैश्विक पटल पर उभरकर सामने आया है।
डॉ० सिक्का विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर भूगोल विभाग में पदस्थापित हैं। डॉ० सिक्का नई दिल्ली के राजौरी गार्डन के रहनेवाले हैं। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक नई दिल्ली से ही प्राप्त की है। स्नातक की डिग्री उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह महाविद्यालय, लोधी रोड, प्रगति विहार से जबकि स्नातकोत्तर व पीएचडी दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनामिक्स से की है। इसी दौरान उन्होंने उत्तर-पच्छिम दिल्ली के रोहिणी से सटे बवाना औद्योगिक क्षेत्र में अवस्थित अदिति महिला महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में बतौर आचार्य अपने पहले सेवा की शुरुआत की। अगस्त 2016 से वर्तमान तक वो यंग एंड अर्ली करियर जियोग्राफर्स (आईजीयू-वायईसीजी) के लिए अंतर्राष्ट्रीय भौगोलिक संघ कार्यबल के सचिव और कोषाध्यक्ष भी हैं।
मिथिला विश्वविद्यालय के शोधार्थियों से भी और खासकर भूगोल विषय के शोधार्थियों से उन्होंने अपील किया है कि आप अपना आलेख लिखें, मैं सदैव यहां के छात्रों व शोधार्थियों के शैक्षणिक उत्थान के लिये प्रतिबद्ध हूँ। मैं छात्रों व शोधार्थियों को हरसंभव मार्गदर्शन प्रदान करूँगा कि कैसे आपका आलेख राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में “यूजीसी केयर लिस्ट से लेकर स्कापस जर्नल” के मानक पर खड़ा उतरे ताकि मिथिला विश्वविद्यालय का पहचान वैश्विक स्तर पर हो और यहां के छात्रों का विश्व में डंका बजे व परचम लहराएं।
यकीनन डॉ० सिक्का ने मिथिला विश्वविद्यालय का मान व सम्मान बढ़ाया है। बीपीएससी 2014 बैच के शिक्षकों के शैक्षणिक गतिविधि से लगातार विश्वविद्यालय कैंपस में सकारात्मक माहौल बन रहा है। समाचार लिखे जाने तक बधाई देनेवालों का सिलसिला जारी है।