दरभंगा: मनुष्य के जीवन में भक्ति का होना जरुरी है। भक्ति के बिना ईश्वर की प्राप्ति हो पाना कठिन है। इसलिए जीवन में परमात्मा की भक्ति करना आवश्यक है। यह विचार गुजरात से आए कथावाचक वक्त वत्सल दास जी महाराज ने खैरा गांव स्थित स्वामी नारायण मंदिर पर आयोजित पांच दिवसीय सत्संगी कथा के दौरान श्रद्धालुओं के बीच व्यक्त किए।
कथा व्यास ने बताया कि जीवन में भक्ति के साथ ज्ञान एवं वैराग्य आ जाए तो समझ लेना चाहिए की परमात्मा का कृपा होने वाली है। वैराग्य भक्ति के पुत्र हैं। ज्ञान, वैराग्य के बिना भक्ति अधूरी है। इसलिए मनुष्य को ये तीनों अति आवश्यक है।
कथा व्यास ने कहा कि संतो का सानिध्य जीवन को संवार देता है। भगवान सुखदेव जी ने पारीक्षत को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताकर उनका जन्म धन्य कर दिया था। भागवत कथा का श्रवण मात्र ही मनुष्य को ईश्वर प्राप्ति का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि मानव को जीवन में नीयत साफ रखना चाहिए। नीयत साफ होगी तो उसका नियति भी साथ देगी। महाभारत में दुर्योधन ने अन्याय के मार्ग पर कदम रखा तो सौ भाई होते हुए भी रणभूमि में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। कथा व्यास ने कहा कि अधर्म की बेल कभी भी हरी भरी नहीं रह सकती। इसलिए जीवन में जितना हो सके परमार्थ करो। यही परमार्थ एक दिन लौटकर मनुष्य का उद्धार कर देता है। ईश्वर भी उन लोगों का भला करते हैं जो उसकी बनाई दुनिया में दीन दुखियों की मदद करता है। कथा के दौरान उन्होंने धार्मिक कथा सहित मानव जीवन को सदमार्ग पर ले जाने वाली कई उपदेशों सहित अन्य प्रसंगों का विस्तार से वर्णन सुनाया।
ज्ञात हो कि बीते मंगलवार से बहादुरपुर प्रखंड क्षेत्र के खैरा गांव अवस्थित स्वामी नारायण मंदिर पर सत्संगी कथा का आयोजन किया जा रहा है।

