दरभंगा। एक तरफ जहां सम्पूर्ण विश्व कोविड महामारी से त्रस्त है वहीं इससे निजात पाने की जद्दोजहद में लगे लोगों का जोश और प्रयास भी कहीं से कम नहीं है। जो जहां हैं वहां से अपनी क्षमता अनुसार जिनसे जो बन पर रहा है वह कर रहे हैं। उनकी सफलता की कहानियां लोगों में भी उत्साह भरने का काम कर रही हैं| इस सकारात्मक बदलाव के पीछे विशेषकर उन लोगों का योगदान उल्लेखनीय होगा जो अत्यंत पिछड़े, आपदाग्रस्त और अशिक्षा एवं निर्धनता से जूझ रहे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी लोगों को रोशनी दिखाने के काम में लगे हुए हैं। ऐसे ही लोगों में से एक नाम है राज किशोर राय। दरभंगा जिले के 46 साल के राज किशोर राय कीरतपुर प्रखण्ड अंतर्गत खैसा जमालपुर पंचायत के रामखेतरियां गांव के निवासी हैं और बिहार सेवा समिति द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से संचालित ” मिशन सुरक्षाग्रह _ कोरोना पर हल्ला बोल” कार्यक्रम के तहत “सुरक्षा प्रहरी” का दायित्व निभा रहे हैं।
कोविड संक्रमण से बचाव को ले उठाई ज़िम्मेदारी
राज किशोर राय ने अपने समाज के लोगों को जागरूक करने और कोविड संक्रमण से बचाने का जिम्मा उठाया। सुरक्षा प्रहरी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर काम में लग गए। शुरुआती सामाजिक विरोध और कठिनाइयों के बावजूद वह अपने सहयोगी प्रीति कुमारी के साथ जागरूकता कार्य में लगे रहे। धीरे धीरे एक सकारात्मक माहौल बनाने में सफल रहे। जब 31 अगस्त को टीका महाअभियान चलाने का निर्णय लिया गया। इससे पहले 29 अगस्त से ही कोसी लबालब भरा हुआ था और पानी बढ़ ही रहा था। अब सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि टीका कर्मी टीकास्थल पर पहुंचे कैसे? ऐसा लग रहा था जैसे वहां टीका का सत्र स्थगित करना पड़ जायेगा। प्रोजेक्ट टीम लीडर श्याम कुमार सिंह और प्रखण्ड समन्वयक रास मोहन झा लगातार प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी कीरतपुर डॉ प्रभाकर, हेल्थ मैनेजर, सुरक्षा प्रहरी राजकिशोर और अन्य स्थानीय लोगों से संपर्क बनाए हुए थे और विकल्प तलाश रहे थे कि कैसे कोसी के अंदर के लोगों को टीका लग जाए और महाअभियान सफल हो।
क्षेत्र में जलजमाव के बीच टीकाकरण को ले बनाई योजना
आखिरकार राज किशोर ने 30 अगस्त की रात प्रभारी को सूचित किया कि वे टीका कर्मियों को निर्धारित डोज के साथ भेजें। जलजमाव के बीच टीका स्थल तक टीका दल को सुरक्षित पहुंचाने और टीकाकरण समाप्ति के बाद सुरक्षित वापस लाने का जिम्मा उनका होगा। उन्होंने अपना काम किया भी। राज किशोर ने ग्रामीणों के टीकाकरण के लिए नावों का प्रबंध किया। लोगों को नाव की मदद से सत्र स्थलों पर लाया गया। कभी-कभी जल में नाव फंस जाता तो राजकिशोर उसे धक्का देकर पार कराते। मुश्किलों को दूर करते हुए 10.30 बजे टीकाकरण शुरू हो पाया। इसके तहत 616 लोगों को प्रथम डोज और 134 को दूसरा डोज था।
वाह राज किशोर! अपने वह कर दिखाया जो बहुत मुश्किल था-
सफलता पूर्वक टीकाकरण संपन्न कर जब टीकाकर्मियों का दल सुरक्षित वापस कोसी तटबंध पर पहुंचा तो प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बिहार सेवा समिति के कर्मी, टीका कर्मी और राजकिशोर, राम प्रवेश और प्रीति तथा नाविक सहित सभी लोगों के चेहरे खुशी से खिल रहे थे। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के मुंह से सहसा निकल पड़ा “वाह राज किशोर! अपने वह कर दिखाया जो बहुत मुश्किल था। आप यह व्यवस्था नहीं कर पाते तो शायद ये लोग टीका नहीं ले पाते। असफलता का दाग हमें लग जाता।” उपस्थित लोगों की देर तक बजती तालियां पर राजकिशोर, राम प्रवेश और प्रीति ने कहा कि यह उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। कदवारा गांव से लौटी टीका कर्मी की टीम ने सुरक्षा प्रहरी राम प्रवेश साहू का विशेष आभार जताया कि उन्होंने तेज धूप से टीका दल को बचाने को अपना छाता भी उन्हें दे दिया और स्वयं धूप सहते रहे।