गोढुल बाबा पूजा की तैयारी जोरों पर, वाल्मीकि समाज ने की बैठक, 8 अगस्त को होगी पूजा
संजय मिश्र
दरभंगा
देव गोढुल बाबा की पूजा को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। मिथिला के वाल्मिकी समाज के अंग जिन्हें परंपरा में डोम समाज कहा जाता है, में इस सालाना पूजा को लेकर अभी से उल्लास है। तैयारी को लेकर बैठकें की जा रही हैं। इस बरस यह पूजा 8 अगस्त को होना तय हुआ है। ऐसी ही एक बैठक मंगलवार को लहेरियासराय के पोलो ग्राउंड के समीप हुई। जिसमें समाज की सहभागिता और पूजा पाठ की तैयारी के समस्त बिंदुओं पर मंत्रणा हुई।
गोढुल बाबा पूजा समिति के अध्यक्ष विक्की मल्लिक ने कहा कि समाज के अपने पुरोहित ने दिन निर्धारित किया है। पूजा डरहार पंचायत में होगी। उन्होंने बताया की पूजा के निमित्त सुअर को पवित्र कर चढ़ाया जाता है। उसके बाद स्थल पर मौजूद समाज के लोग गले मिलते हैं। तत्पश्चात वे सामूहिक भोजन करते हैं।
पूजा समिति के उपाध्यक्ष मुन्ना मल्लिक ने कहा कि गोढूल बाबा के साथ ही देव के रूप में प्रतिष्ठित कुल गुरु बाबा श्याम सिंह और बाबा सुपन्न भगत की पूजा भी की जाती है। यह उल्लास का पर्व है। उन्होंने बताया कि विष्णु भगवान ने सुअर (वाराह) अवतार लेकर समस्त प्राणी जगत की रक्षा की थी। कहा जाता है कि एक शक्तिशाली राक्षस हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में छुपा लिया था। तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लिया और जल राशि में प्रवेश किया। वराह के रूप में उन्होंने हिरण्याक्ष को परास्त किया और पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाकर वापिस अपने जगह पर स्थापित किया।

