कुपोषण को भगाना है तो पोषण वाटिका से जुड़ना होगा – श्याम ।
दरभंगा । जिले के घनश्यामपुर और किरतपुर प्रखण्ड के सभी सुरक्षा प्रहरी को पोषण वाटिका के लाभ और कुपोषण दूर करने में इसके महत्व के बारे में जानकारी दी गई थी और उन्हें कम से कम 10 पोषण वाटिका प्रति सुरक्षा प्रहरी का लक्ष्य दिया गया था जिसमें से 5 पोषण वाटिका नवंबर में और 5 पोषण वाटिका प्रति सुरक्षा प्रहरी दिसंबर में विकसित करवाना था। अभी तक 200 पोषण वाटिका लगाए गए हैं और बड़ी संख्या में इसे लगवाने की तैयारी की जा रही है। प्रोजेक्ट टीम लीडर श्याम कुमार सिंह ने दूरभाष पर बताया कि “जिस प्रकार इस कार्य को लोगों ने स्वीकार किया है उससे यह अनुमान है कि लगभग 1000 पोषण वाटिका दिसंबर में लग जायेंगे जो हमारे निर्धारित लक्ष्य से लगभग दोगुणा होगा। बेशक इनमें कुछ सीजनल सब्जियों की खेती करनेवाले पेशेवर किसान भी शामिल होंगे और कुछ अगले मानसून में नष्ट भी हो सकते हैं बाढ़ के कारण। बावजूद इसके यह एक प्रेरक अनुभव रहा है और कम आय वाले मेहनतकश परिवारों में भी मौसमी हरी ताजी सब्जियां और पौष्टिक आहार शामिल देखकर सुखद अहसास होता है। पोषण वाटिका से कुपोषण दूर करने के प्रयास को बल मिलेगा और कुपोषण दूर होगा।” यह प्रयास यूनिसेफ संपोषित और बिहार सेवा समिति द्वारा संचालित “मिशन सुरक्षाग्रह – कोरोना पर हल्ला बोल” कार्यक्रम के तहत किए जा रहे हैं।
इन पोषण वाटिकाओं में बैंगन, गोभी, बंधा गोभी, सेम, पालक, मेथी, राई, धनिया, कद्दू, सहजन, केला, पपीता, नींबू, आम, आंवला, मिर्ची, बथुआ, पोई, कदीमा, तिलकोर, मूली, गाजर, चुकंदर, टमाटर आदि शामिल हैं। सुरक्षा प्रहरी गूंजा देवी, कविता कुमारी, रिंकू देवी, शैल देवी, सुनीता देवी, ममता देवी, रूबी कुमारी, खुशबू कुमारी, चंदन कुमारी, पुष्प देवी, छोटी देवी और अन्य सुरक्षा प्रहरी लोगों को प्रेरित करने में और मदद करने में लगे हुए हैं।
प्रखण्ड समन्वयक शोभा कुमारी और प्रखण्ड समन्वयक रास मोहन झा जमीनी स्तर पर सुरक्षा प्रहरी, आंगनवाड़ी सेविका, आशा और समुदाय के साथ मिलकर कुपोषण दूर करने के प्रयास में लगे हुए हैं। इसके लिए कई दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, जैसे : आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का क्षमतावर्द्धन, माता पिता और अभिभावकों का बच्चों के घरेलू देखभाल, स्तनपान और उचित ऊपरी आहार, स्वच्छता, गर्भवती और धात्री माताओं के आहार, बच्चों के पूर्ण प्रतिरक्षण आदि विषयों पर प्रशिक्षण के साथ साथ बाल विकास सेवाओं और स्वास्थ्य विभाग की सुविधाओं और योजनाओं का लाभ दिलवाने में समन्वय स्थापित करवाना आदि। श्री सिंह ने बताया कि इसके अलावा सामाजिक पहलुओं पर भी सामुदायिक विमर्श किए जा रहे हैं, जैसे: बाल विवाह को हतोत्साहित करना, दो बच्चों के जन्म के बीच अंतराल को बढ़ाना, बिना लैंगिक भेदभाव के सभी बच्चों की समान देखभाल करना आदि शामिल है।