कटी हुई सांस और खून की नली लेकर पारस ग्लोबल हॉस्पिटल पहुंचा मरीज, डॉक्टरों ने बचाई जान
दरभंगा।पारस ग्लोबल हॉस्पिटल, दरभंगा के डॉक्टरों ने एक 33 साल के युवक की जान बचा ली। वह कटी हुई सांस और खून की नली के साथ गंभीर स्थिति में हॉस्पिटल पहुंचा था। बाबूबढ़ी, मधुबनी के रहने वाले रोशन कुमार राय ( बदला हुआ नाम) एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं। सोमवार (14 जुलाई) को वह ड्यूटी पर जा रहे थे, उसी दौरान एक हादसे में उनका यह हाल हुआ। तत्त्काल बैंडेज-पट्टी कराके वह 2 घंटे के भीतर दरभंगा के पारस ग्लोबल अस्पताल पहुंचे। अत्यंत गंभीर स्थिति को देखते हुए बीपी और पल्स चेकअप के तुरंत बाद ऑपरेशन थिएटर में ले लिया गया। सांस की नली की पाइप, मुंह की नली, गर्दन के खून की नली कटी हुई थी। बस कैरोटिड आर्ट्री बच गई थी, जिसके कारण उसकी जान नहीं गई। खून की नली, मसल्स और फाइबर को सर्जरी के द्वारा रिपेयर कर दिया गया। इसके बाद मैंडिबुलर बोन (लोअर जॉ की हड्डी) तीन जगह से टूटी हुई थी, जिसकी ऑर्थोडेटिंस्ट ने सर्जरी की थी। अब वह बिल्कुल स्वस्थ है और सप्ताह भर के अंदर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।
डॉ, रवींद्र कुमार गुप्ता , सीनियर कंसल्टेंट, जेनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जरी ने बताया कि मरीज की स्थिति इतनी गंभीर थी कि गर्दन से हाथ देने पर मुंह से उंगुली निकल आती थी। जीभ भी कट गई थी। उन्होंने बताया कि इस तरह की गंभीर स्थिति में मरीज अगर 4 घंटे के अंदर (गोल्डेन आवर) हॉस्पिटल पहुंच जाता है तो उसकी जान बचाई जा सकती है।
पारस हॉस्पिटल के जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार ने बताया कि पारस ग्लोबल हॉस्पिटल, दरभंगा आसपास के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। लोग गंभीर से गंभीर स्थिति में भी हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं और इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय मशीनों के कारण यहां मरीजों का बेहतरीन इलाज हो रहा है।
100 बिस्तरों वाले पारस ग्लोबल दरभंगा में एक ही स्थान पर सभी चिकित्सा सुविधाएं हैं। हमारे पास एक आपातकालीन सुविधाए उच्च योग्य और अनुभवी डॉक्टरों के साथ अत्याधुनिक चिकित्सा केंद्र है। पारस इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर बिहार में अपनी विशेषज्ञताए बुनियादी ढांचे और व्यापक कैंसर देखभाल प्रदान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के लिए प्रसिद्ध है।

