राजस्व कर्मचारी हलकान, सरकार को फिकर नहीं, बजा रही बांसुरी
राजस्व कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर चले जाने से अंचल के भूमि संबंधी कार्य ठप्प
करीब 3 हजार स्टाफ हड़ताल (सामूहिक अवकाश) पर
राज्य के 5 सौ राजस्व कर्मचारी निलंबित
संजय मिश्र
दरभंगा
दुःख समझने का वादा कर राहत देने से मुकड़ने की बिहार के टॉप ब्यूरोक्रेट्स की अदा पुरानी है। एक्जीक्यूटिव का हिस्सा होने के बावजूद राज करने की आदत छूटने का नाम नहीं ले रही। सरकारी नीति का अमल बेपटरी हो और कि उसे लागू करने वाले जमीनी स्तर के स्टाफ व्यवहारिक दुःख झेलें .. उनकी बला से। कुछ ऐसे ही चक्रव्यूह में बिहार के राजस्व कर्मचारी फंसे हैं। उनके दर्द को महसूस करने और उनकी समस्याओं के समाधान पर गौर फरमाने वाले कोई नहीं। आजिज आकार राज्य सरकार का ये अपना अंग 7 मई से हड़ताल (सामूहिक अवकाश) पर है। बुधवार 25 मई 2025 को बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के सदस्य प्रेस से मुखातिव हुए। अपना दुखड़ा सुनाया। उम्मीद जताई कि अब सरकार के कान तक उनकी पीड़ा पहुंच पाएगी।
लहेरियासराय में आयोजित प्रेस मीट को संबोधित करते हुए बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला मंत्री फूल कुमार झा ने कहा कि इनके 17 सूत्री मांग की पूर्ति के लिए उनका और उनके संगठन का पूरा समर्थन है। पत्रकारों को झा ने बताया कि तमाम मांगे वित्तीय नहीं हैं। कई तो विशुद्ध मानवीयता, संवेदना और बिखरे परिवार के मिलन से संबंधित हैं। सरकार ध्यान दे तो वो पुण्य की भागी होगी।
उन्होंने बताया कि बिहार राज्य के सभी राजस्व कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर हैं। नतीजतन बिहार भर में अंचल स्तर पर होने वाला भूमि संबंधी कार्य ठप्प है। उल्टे टॉप सरकारी अधिकारी कोअर्सिव मेजर्स (दमनात्मक) से हड़तालियों का मनोबल तोड़ना चाहते हैं। विभाग की ओर से हड़ताली कर्मचारियों को लगातार धमकी दी जा रही है। यहां तक कि राज्य भर में विभिन्न जिलों को मिलाकर करीब 500 से अधिक राजस्व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। दरभंगा में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिसके विरुद्ध संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सभी जिलों के मुख्यालय में प्रतिवाद मार्च किया है।
उन्होंने बताया कि इसके पूर्व भी 4 मार्च 2025 से 13 मार्च 2025 तक पटना के गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन धरना दिया गया था। राज्य सरकार के अपर मुख्य सचिव राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग बिहार पटना के द्वारा आश्वासन दिया गया था कि सभी बिंदुओं पर दो माह में निर्णय लिया जाएगा। परंतु सहमति के बिंदु पर विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। बाध्य होकर राज्य के सभी राजस्व कर्मचारियों ने मांगों की प्राप्ति के लिए 7 मई से संघर्ष का रास्ता चुना है।
भूमि सुधार कर्मचारी संघ के नेता नीतीश कुमार ने मौके पर कहा कि राजस्व कर्मचारियों का पद स्थापन उनके गृह जिला से 300 से 400 किलोमीटर की दूरी पर किया गया है। लिहाजा अपने परिवार और अपने समाज से वे पूरी तरह कट गए हैं। अल्प वेतन भोगी कर्मचारी होने के कारण परिवार को साथ रखना मुश्किल होता है। सरकार मानवीय रुख अपनाए और गृह जिला में पदस्थापन करे।
अपने विभाग के अतिरिक्त जब तब राज्य सरकार के सभी विभागों का दायित्व निभाना पड़ता है। सड़क पर दुर्घटना हो जाए, कहीं नाव पलट जाए या फिर अगलगी हो तो प्रशासन सबसे पहले राजस्व कर्मचारी को ही भेजता है। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्हें ये काम करने होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व कर्मचारियों को ग्रेड पे 2800 दे। अक्सर दो-तीन पंचायत/हलका का काम लिया जाता है इसलिए एक पंचायत से दूसरे पंचायत जाने के लिए प्रतिमाह 2000 रुपया यात्रा भत्ता दिया जाए। लैपटॉप संचालन हेतु आकस्मिक व्यय में आवंटन दिया जाए जो समायोजित हो सके। राजस्व अधिकारी के पद पर प्रोन्नति हेतु कालावधि 10 वर्ष निर्धारित किया जाए। सभी नवनियुक्त राजस्व कर्मचारियों का सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशानुसार सेवा संपुष्टि किया जाए।
सरकार सम्मानजनक वार्ता कर दुःख हरे तो हड़ताली तत्काल काम पर लौट आएंगे। आपको बता दें कि राज्य में करीब 3 हजार राजस्व कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

