PK के टारगेट पर Lalu-Nitish, बोले- नीतीश और RJD का अपना ठिकाना नहीं.. ये क्या किसी को PM बनाएंगे।

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) जन सुराज पदयात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के दौरान मंगलवार को वैशाली के पातेपुर में मीडिया संवाद के दौरान उन्होंने सीएम नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार क्या कर रहे हैं इस पर बोलने का कोई मतलब ही नहीं है। क्योंकि नीतीश का हाल भी चंद्रबाबू नायडू जैसा ही होगा। साथ ही कहा कि नीतीश कुमार और राजद का अपना ठिकाना नहीं है। ये क्या किसी को प्रधानमंत्री बनाएंगे।

प्रशांत किशोर ने कहा कि 2019 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू वो इसी भूमिका में थे, जिस भूमिका में नीतीश आने का प्रयास कर रहे हैं। चंद्रबाबू नायडू भी पूरे देश का दौरा करके विपक्ष को एकजुट कर रहे थे। इसका नतीजा ये हुआ कि आंध्र प्रदेश में उनके सांसद घटकर 3 हो गए, सिर्फ 23 विधायक जीतें और वह सत्ता से ही बाहर हो गए। उन्होंने कहा कि नीतीश और राजद का खुद कोई ठिकाना नहीं है वह देश का प्रधानमंत्री क्या बनाएंगे। नीतीश कुमार पश्चिम बंगाल दौरे पर गए तो नीतीश कुमार से ये पूछना चाहिए कि क्या ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ काम करने को तैयार है? पश्चिम बंगाल में नीतीश कुमार को पूछता कौन है। नीतीश को बिहार की चिंता करनी चाहिए।

पीके ने उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के 10 लाख नौकरियां दिए जाने से जुड़े वादे पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी ने कहा था कि वो 10 लाख नौकरियां दे देंगे और पहली ही केबिनेट में देंगे, लेकिन अभी तक आपने नौकरियां नहीं दी है। अगर आप नौकरियां नहीं दे सकते तो बिहार की जनता से माफी मांग लीजिए। उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी खुद लालू जी के लड़के नहीं होते तो उन्हें कोई नौकरी नहीं मिलती। वहीं भाजपा पर हमला करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में भाजपा की हमेशा से पिछलग्गू की औकात रही है। जिस तरह से कांग्रेस ने दिल्ली में बिहार से सांसद आते रहे उसके लिए बिहार के बच्चों के भविष्य को दांव पर लगाकर लालू का साथ दिया, उसी तरह भाजपा ने बिहार के भविष्य को दांव पर लगाकर नीतीश का साथ दिया।

पीके ने कहा कि 2020 में भाजपा बिहार में सबसे बड़ा दल था और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं बन रहे थे, लेकिन भाजपा ने जिम्मेदारी नहीं ली। भाजपा ने अपना समीकरण ठीक करने के लिए नीतीश का साथ दिया था ताकि केंद्र में उनके सांसद जीतकर जाते रहें। भाजपा को बिहार से सिर्फ 30-40 एमपी जीतने तक का ही मतलब है इससे ज्यादा उनके लिए बिहार कुछ भी नहीं है।

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