दरभंगा। शनिवार को डॉ० लोहिया कर्पूरी विश्वेश्वर दास महाविद्यालय, ताजपुर, समस्तीपुर में प्रधानाचार्य डॉ० शंभु कुमार यादव की अध्यक्षता में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के 141 वें जन्म दिवस के अवसर पर हिन्दी एवं उर्दू विभाग के संयुक्त तत्वावधान में “प्रेमचंद जयंती समारोह” का आयोजन किया गया। इस समारोह के बीज वक्ता हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ० विनीता कुमारी ने अपने संबोधन में बताया की कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की अनेक कहानियां हैं जो हमें समाज की अनेक कुरुतियों से अवगत कराती है। उन्होंने छात्रों को बताया की मुंशी प्रेमचन्द के जीवन से हमें सीख लेनी चाहिए। समारोह के संयोजक डॉ० बलराम कुमार ने प्रेमचंद द्वारा संकलित अनेक कथाओं को सुनाया और छात्रों को उनके जीवन और उनके कथाओं से सीख लेने की अपील की। इस समारोह के अध्यक्ष प्रधानाचार्य डॉ० शंभु कुमार यादव ने संबोधित करते हुए बताया की किसी भी कथाकार का कथा आजीवन उनकी कृतियों को जीवित रखता है। मुंशी प्रेमचंद आजीवन समाज की अनेक कुरीतियों का विरोध किया और उन कुरीतियों को अपनी कहानियों के माध्यम से समाज को आइना दिखाया। उन्होंने अपील किया किया कि कोइ भी कथा या साहित्य यह आवश्यक नहीं है कि केवल भाषा के ही छात्र पढें साहित्य हमारे जीवन को एक रास्ता दिखाता है। इसलिए हमसबों को चाहिए कि कथा और साहित्य का अध्ययन करें। प्रधानाचार्य ने बताया की आधुनिक डिजिटल युग में हमलोग पाठ्य पुस्तक से दूर होते जा रहे हैं जो ठीक नहीं है। इसलिए हमसबों को चाहिए कि किसी भी साहित्यकार का पुस्तक हमें नित्य प्रति अध्ययन करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति का जयंती जब हम मनाते हैं तब यह भी आवश्यक है उनके जीवन के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। समारोह को अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ०प्रभात रंजन कर्ण ने संबोधित करते हुए बताया की मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था वे अपने प्रासंगिक कथाओं के माध्यम से मुंशी प्रेमचंद के नाम से जाने गए।डॉ० कर्ण ने उनके जीवन की अनेक रचनाओं को उदधृत किया और छात्रों को प्रोत्साहित किया। इस समारोह को स्नातक प्रथम खण्ड की छात्रा अर्चना कुमारी, छात्र अंकित कुमार हिन्दी विभाग के पूर्ववर्ती छात्र लालदेव कुमार ने भी संबोधित किया। धन्यवाद ज्ञापन राजनीति विभागाध्यक्ष डॉ० हुस्न आरा ने किया। इस मौके पर डॉ० जगदीश प्रसाद वैश्यंत्री, निशिकांत जायसवाल, रजत शुभ्र दास, डॉ० उदय कुमार, डॉ० हरिमोहन प्रसाद सिंह, आशीष कुमार ठाकुर, डॉ० सुमन पोद्दार, अजीत कुमार, सौरभ कुमार, नितेश कुमार, तबरेज, शेखर, उपेंद्र, रंधीर, गीता देवी, मंजु एवं छात्र छात्राएं आदि शामिल थे।