प्रधानाचार्यो की आपातकालीन ऑनलाइन बैठक कुलपति के अध्यक्षता में हुआ आयोजित

प्रधानाचार्यो की आपातकालीन ऑनलाइन बैठक कुलपति के अध्यक्षता में हुआ आयोजित

 

 

दरभंगा।सी डब्ल्यू जे सी संख्या 34/ 2018 उच्च न्यायालय, पटना द्वारा पारित न्यायादेश एवं यूजीसी द्वारा प्रदत्त अनुदान राशि के बकाए निपटान के संदर्भ में यूजीसी कोलकाता के द्वारा भेजी गई सूची के अनुसार तथा सचिव शिक्षा विभाग बिहार सरकार के पत्रांक- 15 /सी 2- 31/2018- 51 के आलोक में आज दिनांक 22/07/ 2022 को दोपहर 12:00 बजे कुलपति की अध्यक्षता में संबंधित महाविद्यालय के प्रधानाचार्यो की एक आपातकालीन ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। सर्वप्रथम सीसीडीसी डॉ महेश प्रसाद सिन्हा ने सबों का स्वागत करते हुए संबोधन किया।तत्पश्चात ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर मुस्ताक अहमद ने दिनांक : 8, 9 तथा 10 मार्च, 2021 को हुई यूजीसी की बैठक का हवाला देते हुए संबंधित महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों को यूजीसी द्वारा प्राप्त अनुदान राशि के बकाए निपटान हेतु आग्रह किया। दिनांक 21/07/ 2022 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव एन. गोपु कुमार एवं मुख्य सचिव शिक्षा विभाग, बिहार सरकार तथा सभी विश्वविद्यालय के कुलपति तथा बिहार के सभी प्रधानाचार्यों के साथ हुई बैठक में दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन करने पर बल दिया। तत्पश्चात कुलपति ने सभी 54 महाविद्यालय के प्रधानाचार्यों की उपस्थिति पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि यूजीसी ई.आर.ओ. कोलकाता द्वारा प्रेषित सूची में महाविद्यालयों पर बकाए राशि को देखकर अफसोस हो रहा है। दिनांक 10/03/ 2021 को बकाए राशि के सेटलमेंट हेतु विश्वविद्यालय में यूजीसी की बैठक हुई थी, जिसमें प्रो. आर. जे. राव (अध्यक्ष), कुलपति बरकतुउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के साथ लिए गए निर्णय में 25 मार्च, 2022 तक का समय दिया गया था। किंतु अबतक यूजीसी द्वारा प्रदत्त बकाए राशि का समायोजन या निबटान ना हो पाना अपने आप में क्षोभ का विषय है । अपने संबोधन में सभी प्रधानाचार्य को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि दिनांक 25/07/2022 (सोमवार) के अपराहन तक आप सभी बकाए राशि का निपटान कर स्थिति को दुरुस्त करें अन्यथा प्रधानाचार्य सहित बर्सर, लेखापाल एवं कार्यालय प्रधान का वेतन स्थगित कर अनुशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ अपराधिक मुकदमा दायर किया जाएगा। आगे उन्होंने प्रधानाचार्य से यह भी कहा कि जिन महाविद्यालयों द्वारा उपयोगिता प्रमाण-पत्र यूजीसी कोलकाता को प्रेषित कर दिया गया है, बावजूद इसके उन पर बकाया दिखाया जा रहा है, वे तत्काल यूजीसी को मेल कर अपना समाधान सुनिश्चित करें और इसकी सूचना विश्वविद्यालय को प्रेषित करें। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक के समापन की घोषणा की गई।

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