आचार्य विकाश (पूर्व प्रखंड विकास पदाधिकारी सह सहायक प्रोफेसर,अर्थशास्त्र, चंद्रधारी मिथिला महाविद्यालय, लनामिवि दरभंगा)
दरभंगा ।जी हां यकीनन एक ऐसा नाम जो जेहन में आते ही एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार मिलता। जिनके शब्दों में अनुशासन की झलक मिलती है। जिनके भावों में सौम्यता नजर आती है। जिनके आंखों में वो आकर्षण है कि दोस्त क्या अजनबी भी नजर मिला लें तो वो इनका फैन हो जाता है। शालीनता तो मानो जैसे कूट-कूट कर भरी हो। इनके डेडिकेशन का क्या कहना! सी० एम० कॉलेज के विद्यार्थियों के दिलों में शैक्षणिक क्षेत्र में खास स्थान है इनका। नेतृत्व क्षमता तो ऐसा कि इंसान क्या खुदा को भी इन पर कोई शक नहीं होगा। सबका साथ सबका विकास तो जैसे इनके डीएनए में बसता हो। सिलसिला नामक ब्लॉग के रचयिता के रूप में खासी प्रसिद्धि है इनका। जब इनके द्वारा सिलसिला के माध्यम से लिखित लाइनों को पढ़ेंगे तो निश्चित ही गुलजार साहब आपके जेहन में आ जाएंगे। सिलसिला एक ऐसा माध्यम है जो इन्हें गुलजार साहब के समकक्ष ला खड़ा करता है। सिलसिला का एक-एक वाक्य ऐसा अद्भुत जो सीधे आके आपके हर्ट को छू जाता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से छात्र जीवन का सफर लनामिवि० दरभंगा में वाया प्रखंड विकास पदाधिकारी (बिहार सरकार) से होते हुए दस्तक दिया। उच्च शिक्षा से ऐसा लगाव कि इन्होंने 2011 में यूजीसी द्वारा आयोजित नेट परीक्षा में उत्तीर्णता प्राप्त की। तत्पश्चात बीपीएससी में भी सफलता प्राप्त की। 2013 में वो बीपीएससी के माध्यम से प्रखंड विकास पदाधिकारी की सेवा में आ गये। अध्ययन व अध्यापन से इतना लगाव की बीपीएससी के माध्यम से 2014 में बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिये विज्ञापन आया। 2017 में जब बीपीएससी 2014 बैच के असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली का रिजल्ट आया तो उनका चयन हो गया। तब उन्होंने बिना किसी देर किये प्रखंड विकास पदाधिकारी के पद से इस्तीफा दे दिया और बीपीएससी द्वारा आवंटित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के स्थानीय सी० एम० कॉलेज दरभंगा में अर्थशास्त्र में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर उन्होंने ज्वाइन किया। इनके अनवरत प्रयास का ज्वलंत उदाहरण सामने है, जब अल्पसंख्यक विभाग, बिहार सरकार की योजना को महाविद्यालय के तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ० मुश्ताक अहमद के सहयोग से अल्पसंख्यक के लिये बीपीएससी व नेट की क्लास आरंभ की गई। उसे सफलता पूर्वक संचालित करने में इन्होंने अहम भूमिका निभाया। नेट क्लास में इनके अनुभव से लाभान्वित विद्यार्थी अब दूसरों को भी अर्थशास्त्र विषय रखने की सलाह दे रहे हैं। नये शिक्षकों के लिये यकीनन न्यू पेंशन स्कीम विश्वविद्यालय में लागू हो इसके लिये इन्होंने अथक मेहनत किया है। इनके अथक मेहनत व ललक का परिणाम यह हुआ कि एनपीएस के लिये गठित कमिटी का विश्वविद्यालय ने इन्हें बतौर अपना एक सदस्य भी नियुक्त किया। सर के मार्गदर्शन में कई छात्रों ने बीपीएससी में सफलता प्राप्त की है। गौरतलब है कि बीपीएससी साक्षात्कार के लिये छात्रों की हिंदी और इंग्लिश मीडियम में पहली पसंद के रूप में सबसे ज्यादा बिकने व सफलता दिलाने वाला जो किताब “बीपीएससी साक्षात्कार एक हस्तपुस्तिका, अ हैंड बुक फॉर बीपीएससी इंटरव्यू” है, उस किताब के लेखक हैं जो कि मार्केट पर सबसे सस्ते दर पर उपलब्ध है। यही खासियत उन्हें भीड़ से अलग करता है कि इस अर्थयुग में जहां हर कुछ एक “बाजार व व्यापार” है। उस दौर में भी सर ने बीपीएससी साक्षात्कार पुस्तिका का दाम “आर्थिक रूप से विपन्न छात्रों” को ध्यान में रखते हुए सबसे न्यूनतम रखें हैं। निश्चित ही हमारा विश्वास है कि सर आपने अभी तो आगाज ही बेहतरीन किया है अंजाम कितना अद्भुत होगा यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में छिपा है। जहां तक मेरा मानना है कि यकीनन एक दिन वो भी आएगा जब मिथिला विश्वविद्यालय को विश्वपटल पर लाने में आपकी अहम भूमिका साबित होगी और आज न कल भविष्य में आपके प्रशासनिक अनुभव का लाभ भी विश्वविद्यालय को निश्चित रूप से प्राप्त होगा। आपके जैसा इच्छा शक्ति व कर्मवीर समान कोहिनूर हीरा तो वर्षों की खोज में एकाध ही मिलता है जो कि निश्चित ही यह हमारे विश्वविद्यालय का सौभाग्य है। आप लनामिवि दरभंगा को राष्ट्रीय से अंतर्राष्ट्रीय पटल पर ले जाने में आने वाले कल में निश्चित रूप से तुरुप का पत्ता साबित होंगे। मैं किन शब्दों में आपको जन्मदिन की बधाई दूं। मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति के लिये तो यही बहुत बड़ी बात है कि आप जैसे महामानव के जन्मदिन की बधाई देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। महाअष्टमी की देवी माँ महागौरी से आज के इस पावन दिन यही प्रार्थना है कि आपको सरस्वती, समृद्धि, संस्कार, सादगी, संपत्ति, संयम, सफलता, स्वास्थ्य, स्वरूप, संतोष, शालीनता व शक्ति को अनवरत इजाफा करते हुए बरकरार रखें । मेरे शब्दों में कोई त्रुटि हुई हो तो आपसे यह अपेक्षा कि मुझे माफ कर देंगे क्योंकि आपके जीवन यात्रा पर प्रकाश डालना और आपको शब्दों के सीमा में बांधना मेरा क्या किसी के कलमों के रेंज से बाहर की चीज है। चलते-चलते जीवन के 34 वें बसंत के इस महाअष्टमी के इस वेला पर जन्मदिन की ढ़ेरों शुभकामनाएं व बधाई सर। महाअष्टमी की देवी मां महागौरी सदैव आपको प्रसन्न व संपन्न रखें। खबर लिखे जाने तक विश्वविद्यालय के विकास पदाधिकारी प्रो० के० के० साहू, लोक सूचना पदाधिकारी प्रो० नवीन कुमार अग्रवाल, पूर्व जैम ऑफिसर प्रो० प्रनतारति भंजन, भूगोल विभाग के शिक्षक प्रो० गौरव सिक्का, छात्र संघ के पूर्व महासचिव एबीवीपी के उत्सव पराशर, आइसा के पूर्व प्रदेश संयुक्त सचिव संदीप कुमार चौधरी, विश्वविद्यालय के कर्मी सुधांशु शेखर झा सहित मधु कुमारी सिंह आदि ने बधाई दिया।