एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का हुआ आयोजन

दरभंगा। विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग में “जेपी और उनका प्रयोग भारतीय लोकतंत्र के परिपेक्ष्य में” विषय पर एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।
उद्घाटन सत्र में आगत अतिथियों का स्वागत व परिचय विभागाध्यक्ष प्रो० जितेंद्र नारायण ने कहा कि जेपी एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे जो कि देश के बाहरी दुश्मनों से तो लड़े ही साथ ही साथ सत्ता में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर स्वतंत्रता बाद देश के आंतरिक सिस्टम से भी लड़ाई लड़ा। उनके शख्सियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज कई वर्तमान मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर कई कैबिनेट मंत्री तक उनके आंदोलन के उपज हैं और आज भी वो अपना राजनीतिक गुरु जेपी को मानते हैं। संपूर्ण क्रांति के जनक जेपी साहब का खासकर आपातकाल के बाद भारतीय लोकतंत्र के परिपेक्ष्य में उनका अहम योगदान है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के कुलपति सह कांफ्रेंस के मुख्य अतिथि प्रो० संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि जेपी और उनके विचार सदैव प्रासंगिक रहेंगे। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र को स्थापित करने में जेपी की अहम भूमिका रही। स्वतंत्रता आंदोलन में तो उनका अहम योगदान था ही लेकिन इंदिरा गांधी की सरकार में आपातकाल में जो उन्होंने संपूर्ण क्रांति का बिगुल फूका। वो हर काल में जीवंत रहेगा। मानवाधिकार के पुरोधा के रूप में जेपी सदैव याद किये जायेंगे।
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के प्रतिकुलपति सह सम्मानित अतिथि जी० गोपाल रेड्डी साहब ने कहा कि प्राचीन काल से लेकर वर्तमान काल तक बिहार का धरती सौभाग्यशाली रहा है जो देश को एक से एक सपूत दिया। आपातकाल के दौरान जेपी देश के ऐसे नेता थे जिन्होंने संपूर्ण क्रांति के माध्यम से सत्ता के द्वारा थोपित आपातकाल का विरोध किया। समाज को एकजुट किया और तत्कालीन सरकार का विरोध किया। वर्तमान में देश के कई मुख्यमंत्री से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उनके आंदोलन के उपज रहे हैं। देश में लोकतंत्र की स्थापना में उनका अहम योगदान रहा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में हिंदी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान प्रो० प्रभाकर पाठक ने कहा कि जब-जब अन्याय चरम पर होता है तब-तब एक युग पुरुष का अवतार होता है। तत्कालीन केंद्र सरकार के द्वारा आपातकाल में जिस प्रकार से लोकतंत्र का गला घोंटा गया। आवाज उठाने वालों को जेल भेजा जाने लगा। प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गयी। उस समय जेपी एक ऐसे अभय नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया। जिसका सबसे ज्यादा जरूरत देश को था। जेपी ने बिहार सहित पूरे देश को आपातकाल के विरुद्ध एकजुट किया। उनके आंदोलन का ही असर था कि तत्कालीन सरकार को आपातकाल वापस लेना पड़ा और तुरंत बाद हुए चुनाव में भारी हार का मुंह देखना पड़ा।
रूसा के उपाध्यक्ष प्रो० कामेश्वर झा ने कहा कि भारतीय राजनीति में जेपी का स्थान अहम है। लोकतंत्र की स्थापना में जेपी ने जिस प्रकार समाज का नेतृत्व किया उस नेतृत्व ने उन्हें भारतीय इतिहास व राजनीति में लोकनायक के रूप में अमर कर गया। आज कोई गाँव ऐसा नहीं है जहां आज भी जेपी आंदोलन के दो-चार सदस्य न हो। आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि सूचना क्रांति का दौर न होते हुए भी जेपी आंदोलन की दस्तक हर घर तक पहुंची थी। जिसके बदौलत देश को आपातकाल से मुक्ति मिली। भारतीय लोकतंत्र में उनका अहम योगदान स्वर्णिम अक्षरों में उकेड़ित है जो लोकतंत्र के लिये सदैव प्रासंगिक रहेगा।
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, पटना के सचिव प्रो० आर० के० वर्मा ने कहा कि जेपी सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि एक दर्शन थे। उनके विचारों की प्रासंगिकता न्यू इंडिया में अहम था, है और सदैव रहेगा। नये भारत की कल्पना उनके दर्शन के बिना अधूरा साबित होगा। उन्होंने आपातकाल में मानवाधिकार, यातना व प्रताड़ना की लड़ाई लड़ा।
विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो० एम० एस० वर्मा ने युवा जेपी और प्रौढ़ जेपी के बीच के अंतर को रेखांकित किया। इस पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्होंने जेपी आंदोलन के एक-एक तथ्य और बिंदु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज शोधार्थियों को जेपी को पढ़ना, जानना, समझना, आत्मसात करना व शोध करना बेहद प्रासंगिक साबित होगा।
दूसरे सत्र में टेक्निकल सत्र का आयोजन एक साथ दो जगह जुबली हॉल व विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग के कौटिल्य कक्ष में किया गया। जिसमें प्रथम तकनीकी सत्र में बिर्टिश अमेरिकन विश्वविद्यालय फ्लोरिडा, अमेरिका के वाइस प्रेसीडेंट प्रो० मनोज कुमार मिश्रा, यूथोपियन सिविल सर्विस विश्वविद्यालय अदीस अबाबा, यूथोपिया के प्रो० वैगेरी नेगरी, त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो० देवेंद्र मिश्रा, टीआरएम कैंपस, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, वीरगंज,नेपाल के शिक्षक संघ के सचिव प्रो० कन्हैया झा, राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, अहमदाबाद, गुजरात के प्रो० मिहिर भोले, केंद्रीय विश्वविद्यालय गया के सेवानिवृत्त शिक्षक प्रो० एस० एन० सिंह साहब ने द्वितीय सत्र में अपना-अपना प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया।
जबकि दूसरे तकनीकी सत्र में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक, मध्य प्रदेश के कुलपति प्रो० प्रकाश मणि त्रिपाठी, सांची विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश की कुलपति प्रो० नीरजा ए० गुप्ता, सीएसएसपी कानपुर के निदेशक प्रो० ए० के० वर्मा, सामाजिक विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के निदेशक डॉ० आश नारायण राय और जय प्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो० सरोज वर्मा अपना प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया।
इस दौरान दर्जनों शोधार्थियों, छात्र व छात्राओं ने भी अपना पेपर प्रेजेंटेशन किया।
अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में मंच संचालन विश्वविद्यालय के पूर्व सीसीडीसी सह विभागीय शिक्षक प्रो० मुनेश्वर यादव जबकि धन्यवाद ज्ञापन विभागीय शिक्षक प्रो० मुकुल बिहारी वर्मा ने किया।
इस दौरान कुंवर सिंह महाविद्यालय के शिक्षक प्रो० जय कुमार झा, चंद्रधारी मिथिला महाविद्यालय दरभंगा के प्रो० आलोक रंजन तिवारी, बलि राम भगत महाविद्यालय समस्तीपुर की प्रो० शबनम कुमारी, समस्तीपुर महाविद्यालय समस्तीपुर के प्रो० रघुवीर कुमार रंजन, प्रो० नीतू कुमारी, शोधार्थी विजय शंकर चौधरी, राम नाथ शर्मा, नाहिद, हिदायतुल्लाह, छात्र संदीप कुमार चौधरी, दीपक कुमार झा, सिद्धार्थ राज, श्वेता सिमरन सहित सैकड़ों शोधार्थी, छात्र व छात्रा उपस्थित थे।
तकनीकी सहयोग आईटी एक्सपर्ट गणेश पासवान ने दिया।

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