पूर्व विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, के सेवानिवृत्ति के उपरांत हुई विदाई

दरभंगा । आज एक ऐसे शिक्षक का विदाई समारोह आयोजित हुआ जो किसी पहचान के मोहताज नहीं है। जिनके कार्यकुशलता का कोई जोड़ नहीं है। जो मितभाषी भी हैं। जो हाजिरजवाबी भी हैं। जो दक्ष भी हैं। जो शालीन भी हैं। जिन्हें दशकों-दशक तक छात्रावास अधीक्षक होने का गौरव भी प्राप्त है। जो लोगों को देखकर उनके मन को पढ़ने की शक्ति रखते हैं। वो कोई और नहीं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के मनोविज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो० इंद्र कुमार राय हैं। प्रो० इंद्र कुमार राय का जन्म दरभंगा जिला के बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत रामभद्रपुर पंचायत के श्रीदिलपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता हरे कृष्ण राय था। पांच भाइयों में वो चौथे नम्बर पर हैं। प्रो० राय की सहधर्मिणी डॉ० नूतन राय दरभंगा की जानी-मानी प्रख्यात स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ है। जिनका अपना निजी क्लीनिक आकाशवाणी दरभंगा के समीप डेनवी रोड में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के सामने अवस्थित है। प्रो० राय बचपन से पढ़ने में काफी मेधावी छात्र थे। 1 नवंबर 1982 का वो दिन जब उनके प्रतिभा को आयाम मिला और उनका सेलेक्शन मिथिला विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान शिक्षक के रूप में हुआ।
फिर शुरू हुआ उनका शैक्षणिक सफर जो लगातार चलता-चला आया। शोधार्थियों व छात्रों में उनके लोकप्रियता का दूर-दूर तक कोई सानी नहीं। उनका एक-एक लेक्चर छात्रों के लिये महत्वपूर्ण होता था। अपने क्लास, शोधार्थियों व छात्रों के लिये वो बेहद सजग रहते थे। शोधार्थी व छात्र कैसे आगे बढ़े उसके लिये उनके साथ-साथ खुद भी वो साधना करते थे ताकि उनका शोधार्थी व छात्र देश-दुनिया में मनोविज्ञान के क्षेत्र में अपना पताका लहरा सके। दर्जनों शोधार्थियों को उनके मार्गदर्शन में शोध करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जो आज देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित पदों पर काबिज हैं। मिथिला विश्वविद्यालय के दशकों-दशक तक छात्रावास अधीक्षक रहने का उन्हें गौरव प्राप्त है। छात्रावास में रहनेवाले शोधार्थियों व छात्रों को कोई कठिनाई नहीं हो उसके लिये हरसंभव कोशिश करते थे और विश्वविद्यालय प्रशासन से संवाद स्थापित कर उनके समस्याओं का त्वरित निपटारा करने के लिये सदैव प्रयत्नशील रहते थे। जिस कारण हर विभागों के शोधार्थियों व छात्रों में उनकी लोकप्रियता में लगातार बरकरार रहा। अपने हँसमुख स्वभाव, संस्कार, शालीनता, संयमता, धैर्यता, विद्वता, मिलनसारिता के वो एक ऐसे स्तंभ है जिनके बदौलत न केवल शोधार्थियों व छात्रों बल्कि सभी विभागों के शिक्षकों व विश्वविद्यालय प्रशासन में भी उनके लोकप्रियता का जलवा सदैव बरकरार रहा। दशकों-दशक बीत जाते हैं। फिर कभी ऐसे शिक्षक का अवतरण होता है। 31 मार्च 2021 का वो दिन जिस दिन उन्होंने अपने जीवन का 65 वां बसंत पूरा कर लिया और सफलतापूर्वक बेदाग रहते हुए सेवानिवृत्त हो गये। उन्होंने अपने शैक्षणिक काल में “अध्ययन व अध्यापन” की ऐसी ताबड़तोड़ व आतिशी पारी खेला कि शोधार्थियों व छात्रों पर अपनी एक गहरी छाप छोड़ दी। ये उनके शैक्षणिक कार्यकाल का शोधार्थियों व छात्रों के प्रति गहरा लगाव है कि आज कोरोना के वेब कम हो जाने पर छात्रों ने 5 माह बाद आज 1 सितंबर 2021 को स्थानीय जुबली हॉल में उनके विदाई समारोह का भव्य आयोजन किया। जिनमें सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ-साथ उनके ऊपर बने एक टेली फिल्म का भी प्रसारण किया गया।
उनके विदाई समारोह में बेनीपुर के विधायक प्रो० विनय कुमार चौधरी उर्फ अजय चौधरी ने अपने व्यस्ततम रूटीन के बावजूद शिरकत की। इतना ही नहीं विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ० बैद्यनाथ चौधरी उर्फ “बैजू”, पूर्व विधान परिषद सह जदयू नेता प्रो० विनोद कुमार चौधरी, प्रो० दिलीप चौधरी, सामाजिक विज्ञान के संकायाध्यक्ष प्रो० गोपी रमन प्रसाद सिंह, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो० ध्रुव कुमार, पूर्व कुलसचिव सह वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो० अजीत कुमार सिंह, पूर्व उप कुलसचिव प्रथम प्रो० मो० इंसान अली, राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो० जितेंद्र नारायण, नागेंद्र झा महिला महाविद्यालय लहेरियासराय के प्राचार्य प्रो० ऋषि कुमार राय, सरायरंजन कॉलेज के प्रो० चंद्र नारायण झा, प्रो० अमरनाथ सिंह, प्रो० आभा रानी सिन्हा, प्रो० अनीश अहमद , प्रो० विमल कुमार चौधरी, प्रो० अमृत कुमार झा, प्रो० विपुल स्नेही व प्रो० शालिनी झा के साथ-साथ दर्जनों शिक्षकों व मनोविज्ञान के साथ-साथ विभिन्न विभागों के सैकड़ों शोधार्थियों व छात्र-छात्राएं उपस्थित थी।

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