संस्कृत सप्ताह के चौथे दिन पूजन, हवन और उपाकर्म के कार्यक्रम हुआ आयोजित

दरभंगा।संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा में संस्कृत सप्ताह के चौथे दिन के कार्यक्रमों के समाचार
कामेश्वरसिंह-दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में मनाए जा रहे संस्कृत सप्ताह के चौथे दिन श्रावणी पूर्णिमा और रक्षाबन्धन के शुभ अवसर पर सम्पूर्ण विश्व के कल्याण के लिए तथा सम्पूर्ण विश्व के धरोहर के रूप प्रख्यात संस्कृत भाषा के संरक्षण-संवर्द्धन के लिए गत वर्षों की भाँति पूजन, हवन और उपाकर्म के कार्यक्रम आयोजित किये गये।
आज के सभी कार्यक्रम के कामेश्वरसिंह-दरभङ्गा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशिनाथ झा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुए। यजमान के रूप में वेद विभागाध्यक्ष प्रो. विद्येश्वर झा और पुरोहित के रूप में वेद विभाग के एसोसियेट प्रोफेसर एवं परीक्षा नियन्त्रक डॉ. विनय कुमार मिश्र ने पूजन और हवन का कार्य सम्पादित किया। उपाकर्म विधि में वेद विभागाध्यक्ष प्रो. विद्येश्वर झा आचार्य के रूप में सभी वेदों के प्रारम्भिक मन्त्रों का प्रथमतः उच्चारण कर अपने शिष्यों को पुनः उसी स्वर में बोलने को प्रेरित करते थे और वेद विभाग के अन्य शिक्षक और छात्र उन मन्त्रों को पुनः उसी स्वर में सुनाते जाते थे।
पूजन, हवन तथा उपाकर्म विधि के सम्पन्न होने के पश्चात् कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शशिनाथ झा ने उपाकर्म विधि के बारे में जानकारी दी कि प्राचीन काल में वसन्त ऋतु में अग्निस्थापन कर वेद, वेदांग तथा अन्य शास्त्रों का अध्ययन-अध्यापन प्रारम्भ किया जाता था। पढ़े हुए इन पाठों की पुनरावृत्ति श्रावणी पूर्णिमा के दिन से ही विधिवत् शुरु की जाती थी और कई मासों तक वह चलता रहता था। जिससे पढ़े हुए शास्त्र कभी विस्मृत नहीं हो। इस प्रकार पढ़े हुए शास्त्रों की रक्षा के लिए ही हमारे यहाँ के ऋषि-मुनियों ने उपाकर्म विधि प्रारम्भ की थी, जो देश के कई भागों में आज भी प्रचलित है। अपने विश्वविद्यालय के पंचांग में भी श्रावणी पूर्णिमा के दिन उपाकर्म लिखा रहता है। वस्तुतः हमारे शास्त्रों में वर्णित उपाकर्म विधि हमें यही शिक्षा देती है कि हम अपने जीवन में जो-जो अच्छी बातें सीखें उन्हें जीवन भर के लिए याद रखें। शास्त्रों की रक्षा के लिए ही आचार्यों द्वारा अपने-अपने शिष्यों को आज के दिन रक्षासूत्र बाँधने की भी परम्परा प्रारम्भ हुई। अतः आज के दिन को रक्षाबन्धन का पर्व भी कहा जाता है। पुनः आगे कुलपति ने रक्षाबन्धन के अवसर पर सभी को अपनी हार्दिक शुभकामना भी प्रदान की।
आज का यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय मुख्यालय स्थित स्नातकोत्तर परिसर के यज्ञमण्डप पर कोरोना प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए सीमित शिक्षकों एवं छात्रों के बीच आयोजित किया गया। आज के कार्यक्रम को सफल बनाने में स्नातकोत्तर वेद विभाग के शिक्षक डॉ. सत्यवान् कुमार, छात्र के रूप में मनोरंजन झा और पतंजलि झा की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही।
इस अवसर पर संस्कृत सप्ताह-महोत्सव के संयोजक प्रो.सुरेश्वर झा, अध्यक्ष, छात्रकल्याण भी ऑनलाइन उपस्थित रहे। इन्होंने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह रक्षाबन्धन का पर्व वास्तव में शास्त्रों की रक्षा के साथ ही मानवता, विश्वबन्धुत्व की भावना, सद्बुद्धि और सामाजिक सद्भाव की रक्षा करने के लिए संकल्प लेने का एक शुभ अवसर है।
इस कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी जूम ऐप और यूट्यूब पर हो रहा था, जिसमें शिक्षक के रूप में प्रोफेसर मीना कुमारी, डॉ. दिलीप कुमार झा, डॉ. पुरेन्द्र वारिक, डॉ. कुणाल कुमार झा, डॉ. ममता पाण्डेय, असिस्टेन्ट प्रोफेसर डॉ. ध्रुव मिश्र, डा. चन्द्रेश उपाध्याय आदि और छात्र के रूप में राजकुमार, शाश्वत मिश्र इत्यादि की उपस्थिति उल्लेखनीय है। ज़ूम एप और यूट्यूब पर इस कार्यक्रम के लाइव प्रसारण में स्ना.व्याकरण विभाग की सहायक प्राचार्या डा. साधना शर्मा की भूमिका प्रशंसनीय रही।

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