संस्कृत के विकास में संस्कृतज्ञ ही बाधक :-नवनियुक्त प्रतिकुलपति

दरभंगा।संस्कृत विश्वविद्यालय के नवनियुक्त प्रोवीसी प्रो0 सिद्धार्थ शंकर सिंह ने आज शुक्रवार को अपना योगदान देने के बाद उपस्थित पदाधिकारियों व कर्मियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज जब संस्कृत की दशा व दिशा को गहराई से देखते हैं तो काफी दर्द होता है।एक टीस सी उठती है। संस्कृतज्ञ हूँ और संस्कृत में ही जीना चाहता हूँ लेकिन एक बात स्पष्ट रूप से यहाँ कहना चाहता हूं कि संस्कृत के विकास में और कोई नहीं बल्कि सबसे पहला बाधक हम संस्कृतज्ञ ही खुद हैं। हम अपनी भूमिका भूल गए हैं। उत्तरदायित्व से भी मुकर गए गए हैं। हम सुधरेंगे तो समाज बदलेगा और बेशक इससे संस्कृत के प्रति उपजे वैराग्य से समाज को छुटकारा मिलेगा।
उक्त जानकारी देते हुए उपकुसचिव प्रथम निशिकांत ने बताया कि कुलपति आवास पर अपने योगदान की प्रक्रिया को सम्पन्न करने के पश्चात प्रोवीसी प्रो0 सिंह ने खुलासा किया कि समय आ गया है हमसभी मिलकर संस्कृत के उत्थान व विकास के लिए कार्य करेंगे। समाज से सीधे जुड़कर इस देववाणी की न सिर्फ रक्षा करेंगे बल्कि इसे अक्षुण्ण रखने का भी समेकित प्रयास करेंगे।
वहीं कुलपति डॉ0 शशिनाथ झा ने कहा कि प्रतिकुलपति प्रो0 सिंह विद्वान हैं।जिनके आने से विश्वविद्यालय बेशक प्रगति करेगा।हमसभी मिलकर जरूर एक नया इतिहास बनाएंगे।
मौके पर डीन प्रो0 सुरेश्वर झा, एलओ डॉ पवन कुमार झा, भूसंपदा पदाधिकारी डॉ अवधेश चौधरी, एफओ रतन कुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ विनय मिश्र, विकास पदाधिकारी डॉ दिनेश झा,प्रो0 दिलीप कुमार झा, कौशल महतो, रविन्द्र मिश्र, पंकज मोहन झा, अभिमन्यु कुमार समेत कई कर्मी मौजूद थे।

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