गंभीर हालत में पहुंचे 20 वर्षीय युवक की पारस ग्लोबल हॉस्पिटल ने बचाई जान
• कुल्हे के ऊपर गोली लगने से आफत में आ गयी थी जान
• दरभंगा में किसी अस्पताल ने भर्ती लेने से कर दिया था इनकार
दरभंगा।गोली लगने के बाद आफत में फंसे 20 वर्षीय युवक की पारस ग्लोबल हॉस्पिटल, दरभंगा ने जान बचा ली। फुलपरास का यह युवक गोली लगने के बाद जीवन की गंभीर स्थिति में पहुंच चुका था। दरभंगा के लगभग सभी प्रमुख अस्पतालों में भटकना पड़ा, लेकिन उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए कहीं भी भर्ती नहीं लिया गया। युवक को दाहिने कुल्हे के ऊपर गोली लगी थी, जिससे धमनी (आर्टरी) में चोट आ गई थी और बहुत ज्यादा खून निकल चुका था।
अंततः परिजन युवक को पारस ग्लोबल हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिना देरी किए उसे आपातकालीन कक्ष में ले जाकर उपचार शुरू किया।
*सीनियर कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक्स डॉ. ज्ञान रंजन* ने न्यूनतम चीरा लगाकर सफल ऑपरेशन कर गोली निकाली। उन्होंने बताया कि युवक जब यहां लाया गया था, तब वह बेहद गंभीर स्थिति में था और अगर इलाज में तीन-चार घंटे की और देरी होती, तो उसकी जान भी जा सकती थी। ऑपरेशन के बाद मात्र दस दिनों में मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब एक महीने में उसकी सेहत लगभग सामान्य हो गई है।
पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल के *जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार* ने बताया कि यह केस अस्पताल की तत्परता और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कुशलता का उदाहरण है। अस्पताल में समय रहते सही इलाज मिलने से युवक की जान बच सकी।
*पारस एचएमआरआई के बारे में*
पारस एचएमआरआई पटना ने 2013 में परिचालन शुरू किया। यह बिहार का पहला कॉर्पोरेट अस्पताल है जिसके पास परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा लाइसेंस प्राप्त कैंसर उपचार केंद्र है। जून 2024 में एक्सेस किए गए एनएबीएच पोर्टल के अनुसार, पारस एचएमआरआई अस्पताल, पटना 2016 में एनएबीएच मान्यता प्राप्त करने वाला बिहार का पहला अस्पताल था। 30 सितंबर 2024 तक इस अस्पताल की बेड क्षमता 350 बेडों की है, जिसमें 80 आईसीयू बेड शामिल हैं।

