डॉ. बी. आर. अंबेडकर के लोकतांत्रिक विचार पर स्थानीय मिल्लत कॉलेज, लहेरियासराय में आयोजित हुआ ऐतिहासिक व्याख्यान।
दरभंगा । स्थानीय मिल्लत महाविद्यालय, लहेरियासराय, दरभंगा के राजनीति विज्ञान विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी) के तत्वावधान में “डॉ. बी. आर. अंबेडकर के लोकतांत्रिक विचार” विषय पर ऐतिहासिक व्याख्यान का आयोजन प्रधानाचार्य प्रो. मो. इफ्तेखार अहमद की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रधानाचार्य प्रो. मो. इफ्तेखार अहमद ने कहा कि बाबा साहब निर्मित भारतीय संविधान की इससे बड़ी खूबसूरती क्या हो सकती है जहां अभिव्यक्ति की आजादी, स्वतंत्रता, समानता, न्याय, लोकतंत्र, गरिमा, बंधुत्व, व्यापकता, लचीलापन और विभिन्न देशों के संविधानों से ली गई श्रेष्ठ विशेषताओं और संघात्मकता व एकात्मकता का मिश्रण है। जहां संविधान समाज व राज्य की मूल इकाई के रूप में “व्यक्ति” को मानता है।
बतौर मुख्य अतिथि अंबेडकर चेयर के संरक्षक सह मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष सह राजनीति विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त आचार्य प्रो. अनिल कुमार झा ने कहा कि शासन की सबसे अद्यतन व सुप्रीम व्यवस्था है लोकतंत्र, जिसके जनक के रूप में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर सदैव याद किये जायेंगे, उस महामानव को मैं सबसे पहले नमन करता हूँ। उस लोकतंत्र को राजतंत्र के बाद आजाद भारत में स्थापित करने के लिये बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को संविधान निर्माण के लिये चुना गया। बाबा साहब स्वयं भी उस वर्ग से आते थे जिन्होंने समाज के सबसे अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्तियों का भी दर्द जानते थे क्योंकि तत्कालीन समय में भारत में जातीय आधार पर काफी विषमताएं थी। उस विषमताओं को पाटने के लिये और समानता लाने के लिये बाबा साहब ने लोकतांत्रिक मूल्यों को जिस तरीके से भारतीय संविधान में समाहित किया, ये उनके दूरदर्शी सोच का परिणाम है। आज बात स्वतंत्रता की हो, अभिव्यक्ति की आजादी की हो, मानवीय गरिमा व मूल्यों की हो। वो सब बाबा साहब का देन है जिसे उन्होंने भारतीय संविधान में समाहित किया है। उनका एक ही मकसद था कि बिना समानता लाएं भारत को विश्व के शीर्ष देशों की सूची में शुमार नहीं किया जा सकता है। आगे उन्होंने बाबा साहब के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विचार पर विस्तार से प्रकाश डाला।
महाविद्यालय के वरीय आचार्य सह भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो. महेश चंद्र मिश्र ने कहा कि देश-दुनिया सदियों तक राजतंत्र के अधीन रहा। राजतंत्र में हर फैसले के लिये राजा ही सर्वोपरि था और उनका फैसला सर्वमान्य था। जनता को निर्णय लेने का अधिकार सीमित था। जिस वजह से राजतंत्र के जगह लोकतंत्र की अवधारणा को लाया गया और अब्राहम लिंकन का अवधारणा “जनता का, जनता के लिये और जनता के द्वारा” को भारतीय संविधान में समाहित करने का काम बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने किया और मानवीय मूल्यों को देश में स्थापित किया।
मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव सह वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मुस्तफा कमाल अंसारी ने मिथिला के पारंपरिक परिधान पाग, चादर व पुष्प-गुच्छ देकर सभी आगत अतिथियों का स्वागत किया और विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि आज महाविद्यालय के लिये सौभाग्य की बात है कि महाविद्यालय प्रांगण में इतने महत्वपूर्ण विषय पर व्याख्यान होने जा रहा है, आप सबों के बीच में बतौर मुख्य वक्ता पूर्व सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार झा का संबोधन होने जा रहा है। आप सब इन्हें सुने और इस विषय पर अपना-अपना ज्ञानवर्धन करें।
मंच संचालन राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ. जोहा सिद्दीकी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष सह परीक्षा नियंत्रक डॉ. मो. जमशेद आलम ने किया। इस व्याख्यान में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, आचार्य सहित सैकड़ों छात्र-छात्रा उपस्थित थे।

