संस्कृत-विश्वविद्यालय में संस्कृत-सप्ताह कार्यक्रम संस्कृत दिवस के रूप में श्रावणी-पूर्णिमा को मनाया जाएगा

दरभंगा।कामेश्वर-सिंह संस्कृत-विश्वविद्यालय में आन्तर्जालिक संस्कृत-सप्ताह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है । संस्कृत दिवस श्रावणी-पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। श्रावणी- पूर्णिमा से तीन दिन पूर्व एवं तीन दिन पश्चात्, इन सात दिवसों के समय को संस्कृत सप्ताह कहा जाता है| विश्व के सभी संस्कृतानुरागी इन सप्ताह को हर्षोल्लास से मनाते हैं। कामेश्वर-सिंह–दरभंगा-संस्कृत-विश्वविद्यालय द्वारा १९ अगस्त २०२१ से २५ अगस्त २०२१ तक संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है| कोरोना महामारी के कारण ये कार्यक्रम अन्तर्जाल द्वारा ज़ूम एप्प पर किया जा रहा है।
आज संस्कृत सप्ताह महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम में कामेश्वर-सिंह-दरभंगा-संस्कृत-विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशिनाथ-झा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्कृत भाषा के विकास के लिए दो पक्ष संरक्षण एवं प्रसार पर बल दिया | सत्र के मुख्यातिथि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के निदेशक प्रो. अर्कनाथ चौधरी , जो श्रीसोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भी रह चुके हैं, , उन्होंने कहा कि आज भी हम जो बोलते हैं वह सब संस्कृत के ही धातुओं से बने है| इन्होंने देश की स्वतन्त्रता में संस्कृत एवं संस्कृत के बल पर राष्ट्र में बनने वाली एक संस्कृति के महत्त्वपूर्ण योगदान को भी स्मारित कराया। विशिष्टातिथि बेनीपुर के विधायक डा. विनय कुमार चौधरी , जो अभिषत् एवं अधिषत् के सदस्य भी हैं , शिक्षा-शास्त्र-विभाग- के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं, इन्होंने संस्कृत के विकास के लिए संस्कृत का वातावरण बनाने पर बल दिया। इन्होंने संस्कृत–विद्वानों को घर में भी संस्कृत बोलने को कहा । उन्होंने अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. सुरेश्वर झा के प्रस्ताव पर कहा कि इस विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनाया जाना चाहिए। इसके लिए यहाँ के विद्वानों को चाहिए कि वे एतदर्थ प्रयत्नशील हों, जिसमें वे हर अपेक्षित सहयोग देंगे। सत्र के विशिष्टातिथि विशिष्ट विद्वान् डा. हीरानाथ झा जो मगध विश्वविद्यालय के कई संस्थओं में अध्यापन-कार्य किया है और
जो महावैयाकरण प. दीनबन्धु-झा के पौत्र हैं इन्होंने भी संस्कृत के महत्त्व को अपने उद्बोधन में प्रकाशित किया ।
वैदिक मंगलाचरण स्नातकोत्तर-वेद-विभागाध्यक्ष प्रो. विद्येश्वर-झा एवं पौराणिक मंगलाचरण शोध-प्रभारी प्रो. दयानाथ झा के द्वारा किया गया । संपूर्ण संस्कृत सप्ताताह कार्यक्रम के आयोजक अध्यक्ष, छात्र-कल्याण प्रो. सुरेश्वर-झा ने अतिथियों के लिए स्वागत भाषण दिया । स्वागत भाषण में उन्होंने अपने विचार व्यक्त किये कि संस्कृत दिवस और संस्कृत सप्ताह के आयोजन का ही प्रभाव हुआ कि आज राष्ट्र में तीन केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय हो गये हैं और प्रायः अधिकतर राज्यों एक एक संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हो चुकी है। धन्यवाद ज्ञापन स्नातकोत्तर- साहित्य-विभाग की प्राचार्या प्रो. मीना कुमारी द्वारा किया गया ।सत्र का संयोजन स्नातकोत्तर- व्याकरण-विभाग की सहायक प्राचार्या डा एल सविता आर्या के द्वारा किया गया ।सत्र में लगभग 50 से अधिक विद्वान् और संस्कृतप्रेमी उपस्थित थे।

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