दरभंगा: श्रम संसाधन विभाग के धावा दल द्वारा गुरुवार को एक बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया है। इस संबंध में दरभंगा के श्रम अधीक्षक राकेश रंजन ने बताया कि जाले के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मनीष कुमार के नेतृत्व में सदर अनुमण्डल क्षेत्र अन्तर्गत जाले प्रखण्ड के विभिन्न दुकानों एवं प्रतिष्ठानों में धावा दल की टीम द्वारा सघन जाँच अभियान चलाया गया।

सघन जाँच अभियान के दौरान धावा दल की टीम द्वारा कमतौल के हाई स्कूल चौक अवस्थित राधा गोविंद स्वीट्स से एक बाल श्रमिक को विमुक्त कराया गया।

श्रम अधीक्षक के द्वारा बताया गया कि विमुक्त बाल श्रमिक को बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थापित कर निर्देशानुसार उन्हें बाल गृह में रखा गया है तथा बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम-1986 के तहत नियोजक के विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि बाल श्रमिकों से किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान में कार्य कराना बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम-1986 के अन्तर्गत गैर-कानूनी है तथा बाल श्रमिकों से कार्य कराने वाले व्यक्तियों को 20,000/- रुपये से 50,000/- रुपये तक का जुर्माना और 02 वर्षों तक के कारावास का प्रावधान है।

श्रम अधीक्षक के द्वारा बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में अभी तक दरभंगा जिले के विभिन्न प्रखण्डों से धावा दल के द्वारा अब तक 46 बाल श्रमिकों को विमुक्त कराकर उनका पुनर्वासन लगातार कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि धावा दल की टीम के द्वारा आज जाले प्रखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों एवं सभी दुकान एवं प्रतिष्ठान में सघन जाँच की गई तथा सभी नियोजकों से किसी भी बाल श्रमिक को नियोजित नहीं करने हेतु एक शपथ पत्र भरवाया गया।

इस धावा दल टीम के सदस्य के रूप में जाले, बेनीपुर के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी के साथ प्रयास संस्था से नारद मंडल कार्ड्स संस्था से नारायण कुमार मजमुदार, तहसीन आलम, प्रोग्राम कॉर्डिनेटर अजय कुमार एवं अन्य शामिल थे।

श्रम अधीक्षक के द्वारा बताया गया कि धावा दल नियमित रूप से प्रत्येक सप्ताह संचालित होगा तथा दरभंगा शहर के अलावा सभी अनुमंडल मुख्यालय एवं प्रखण्ड मुख्यालयों में भी धावा दल संचालित किया जाएगा तथा बाल श्रमिकों को नियोजित करने वाले नियोजकों के विरूद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।