इस दौरान उन्होंने सकरी-हसनपुर नई रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत अब तक पहले चरण में 36 किमी लंबे सकरी से बिरौल तक तथा दूसरे चरण में 8 लंबे बिरौल से हरनगर तक निर्माण कार्य पूरा करते हुए, उन पर ट्रेनों का परिचालन प्रारंभ किया जा चुका है.
बताया जाता है की अब 11 किमी लंबे हसनपुर रोड से बिथान तक निर्माण कार्य पूरा करते हुए सीआरएस के द्वारा निरीक्षण किया गया है.शेष बचे भाग का निर्माण कार्य (बिथान से कुशेश्वरस्थान तथा कुशेश्वरस्थान से हरनगर तक) का कार्य तीव्र गति से जारी है. इस रेल लाइन के बनने से हसनपुर और कुशेश्वरस्थान एक दूसरे से जुड़े।
बिथान पंचायत के पूर्व मुखिया जगरनाथ महतो ने सड़क से लेकर सदन तक हसनपुर – सकरी रेलवे परियोजना के लिए संघर्ष किए थे. हालांकि वो अभी इस दुनियां में नहीं हैं. लेकिन आज भी इस रेलवे परियोजना के लिए जो वो संघर्ष किये बच्चे बच्चे के जुवान पर है. 1951 में पहली बार इस योजना के लिए जांच की गई. 1953 में रेलवे बोर्ड ने कहा बाढ़ के इलाके में यह संभव नहीं है. 1972 में तत्कालीन रेलमंत्री स्व. ललित नारायण मिश्रा ने सर्वे की घोषणा की.
तीन रेल मंत्री का प्रयास लाया रंग
इस बीच समस्तीपुर स्टेशन पर बम विस्फोट में ललित बाबू की हत्या हो गई. इसके इस योजना को मिथिलांचल के विकास के लिए जरूरी बताते हुए पुनः खोली व फंड उपलब्ध कराकर शिलान्यास किया. स्व .रामविलास पासवान के रेलमंत्री से हटते ही कई वर्षों तक इस योजना को राशि नहीं मिली. लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री बनने पर इस योजना को फंड मिलना शुरू हुआ.
चालू वितीय वर्ष में 75 करोड़ रुपये मिले ही, आगे की काम कराया जायेगा. संरक्षा आयुक्त के साथ समस्तीपुर के डीआरएम आलोक अग्रवाल, सीएओ पी के के गोयल, स्टेशन मास्टर मनोज चौधरी, मंडल सुरक्षा आयुक्त एस ए जानी, हसनपुर आर पी एफ प्रभारी गोविंद सिंह, चंदन कुमार व अन्य रेल अधिकारी मौजूद रहे