सृजन घोटाला के आरोपी कैदी की पटना के बेऊर जेल में मौत, प्रशासन में मची खलबली।

पटना के बेउर जेल में बंद सृजन घोटाला के आरोपी अरुण कुमार की देर रात पीएमसीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई। अरुण कुमार की पत्नी अरुण गुप्ता ने आरोप लगाया है कि पटना के बेउर जेल के अधिकारियों की लापरवाही के कारण अरुण कुमार की मौत हुई है। अरुण कुमार भागलपुर में जिला कल्याण पदाधिकारी के पद पर आसीन थे। इस घोटाले की किंगपिंग रही मनोरमा देवी के बेटे अमित कुमार और बहू रजनी प्रिया कि सीबीआई अबतक गिरफ्तार नहीं कर पाई है।

बिहार में 880 करोड़ से अधिक के चर्चित सृजन घोटाला मामले में अरुण कुमार और उनकी पत्नी इंदु गुप्ता आरोपी थे। सृजन घोटाले की जांच कर रही सीबीआई में अरुण गुप्ता एवं उनकी पत्नी इंदु गुप्ता पर मामला दर्ज कराया गया था। इसके अलावा अरुण कुमार पर मनी लॉन्ड्रिंग का भी मामला दर्ज था। सीबीआई ने अरुण गुप्ता को 12 अगस्त 2017 को भागलपुर के गोरहट्टा चौक से गिरफ्तार किया था। कुछ दिन जेल में रहने के बाद अरुण कुमार का स्थानांतरण पटना के बेउर जेल कर दिया गया था। तबसे अरुण कुमार पटना के बेउर जेल में बंद है। अरुण कुमार की पत्नी इंदु गुप्ता का सृजन घोटाला मामला में अभी कुछ दिन पूर्व ही बेल से राहत मिल चुकी है।

सृजन महिला सहयोग समिति एक एनजीओ है, जिसके खातों में 2004 से 2014 के बीच सरकारी रुपये की बड़ी राशि फर्जी तरीके से स्थानांतरित की गई थी। संगठन का कार्यालय बिहार के भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड में स्थित है।

सृजन घोटाले की शुरुआत भागलपुर में एनजीओ के द्वारा महिलाओं को वोकेशनल ट्रेनिंग देने से शुरू हुई। एनजीओ पर भागलपुर जिला प्रशासन के खातों से जिला अधिकारियों, बैंकरों और उसके कर्मचारियों की मिलीभगत से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकारी धन की हेराफेरी करने का आरोप है। इसका खुलासा 3 अगस्त 2017 को उस समय हुआ जब 10.32 करोड़ रुपये का सरकारी चेक खाते में अपर्याप्त राशी होने के कारण बाउंस हो गया।
अरुण कुमार की पत्नी इंदु गुप्ता ने आरोप लगते हुए कहा कि बुधवार को जब वह अपने पति अरुण कुमार से मिलने बेउर जेल आई तो अरुण कुमार ने बताया कि उनकी तबियत ख़राब है। उनकी तबियत खराब होने के बाद भी जेल प्रशासन ने सही से उनका इलाज नहीं कराया जिस वजह से उनकी मौत हो गई। इंदु गुप्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि अरुण कुमार की मौत शनिवार को बेउर जेल में ही गई थी और उनकी मौत के बाद जेल प्रशासन ने खुद को बचाने के लिए अरुण कुमार को इलाज के नाम पर पटना के पीएमसीएच भेज दिया था। इंदु गुप्ता ने बताया कि जब वह पीएमसीएच पहुंचे तो उनकी मौत पूर्व में ही हो चुकी थी। इंदु गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर जेल प्रशासन से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन कई बार कॉल करने के बाद भी जेल के किसी भी अधिकारी ने कॉल रिसीव नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए।

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