सुविख्यात जनकवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग में विचार गोष्ठी आयोजित।

सुविख्यात जनकवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग में विचार गोष्ठी आयोजित।

सुविख्यात जनकवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग में विचार गोष्ठी आयोजित की गई।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश उत्पल ने कहा कि धूमिल जी ने अल्पायु में ही हिन्दी कविता को एक नया प्रतिमान दिया। उनकी एक कविता भी उनकी भाषा के ताप को समझने के लिए पर्याप्त है। वो अपनी कविता के माध्यम से जनता के साथ–साथ चलते हैं लेकिन उन्होंने कभी भी सत्ता के साथ कदमताल नहीं किया। धूमिल कविता के माध्यम से जनजागृति का दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

वहीं विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के वरीय प्राध्यापक प्रो. सुरेंद्र सुमन ने कहा कि तमाम तरह के लूट-झूठ एवं शोषण–दमन पर आधारित सत्ता को खुल कर चुनौती देने का नाम धूमिल है। नक्सलबाड़ी आंदोलन की चेतना के प्रखर मस्तिष्क इंकलाबी कवि धूमिल का कविता में प्रवेश उस दौर में हुआ जब देश में आपातकाल था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अर्जित मूल्यों का क्षरण हो रहा था। पूरे देश में विद्रोह, विक्षोभ की स्थिति थी। धूमिल समाज की, व्यवस्था की उन विसंगतियों को अपनी कविताओं में बखूबी स्थान देते हैं।

दरअसल उनका ‘दूसरे प्रजातंत्र की खोज’ जनता की मुकम्मल आजादी की आकांक्षा है। आज अघोषित आपातकाल के दौर में धूमिल अगर जीवित होते तो निश्चित ही किसी कैदखाने में पाए जाते।

जनविरोधी राजनीति की हर साजिश के विरुद्ध लड़ना ही धूमिल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. विजय कुमार ने कहा कि हिन्दी साहित्य का मिजाज ही सत्ता के प्रतिपक्ष का रहा है। धूमिल हिन्दी साहित्य के इस मिजाज के प्रतिनिधि कवि हैं। उनकी कविताएं क्रांति का आह्वान करती हैं। मसलन ‘संसद से सड़क तक’ कविता को हीं लें, यह एक नारा है। जिसका लाभ आपको उठाना है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता ने धूमिल का विस्तृत जीवन परिचय देते हुए कहा कि उनकी कविता का आकाश बहुत विराट है। वे सच्चे मायनों में क्रांतिदर्शिता के रक्षक साहित्यिक थे।

मौके पर आरके कॉलेज की प्राध्यापिका डॉ. हनी दर्शन ने कहा कि धूमिल पर बात करना प्रतिरोध के ताप को महसूस करना है। वे जनता की आवाज बनते हुए, उसकी यथास्थितिवादी मानसिकता पर चोट करते हैं।

सीएम कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष अखिलेश राठौड़ ने धूमिल की कई कविताओं का पाठ किया। धूमिल के हवाले से उन्होंने कहा कि कविता मनुष्यता की हिफाज़त करती है।

कार्यक्रम में सीएम कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. आलोक कुमार राय एवं शोध छात्र समीर, दुर्गानंद, मलय, अनुपम, रोहित, कंचन, बेबी, निशा, शोभा रानी, बबिता, शिखा सहित स्नातकोत्तर छात्र–छात्राओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। धन्यवाद ज्ञापन वरीय शोध छात्र समीर ने किया।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *