दरभंगा । बहादुरपुर सीएचसी में गुरुवार को 16 से 21 सितंबर तक चलने वाले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का जिलास्तरीय उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ अनिल कुमार नेे ढाई साल की बच्ची अंजनी को एल्बेंडाजोल टेबलेट खिलाकर शुरुआत की गई। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के नियंत्रण हेतु स्वास्थ्य विभाग पिछले 1 साल से अधिक समय से प्रयासरत है। इसी क्रम में आवश्यक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का नियमित रूप से संचालन करना भी जनहित में आवश्यक है। बच्चों में कृमि संक्रमण, अस्वक्षता तथा दूषित मिट्टी के संपर्क से होता है। 1 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को कृमि मुक्त करने हेतु कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। यह कार्यक्रम सभी एएनएम आंगनबाड़ी सेविका आशा एवं स्कूल के माध्यम से चलाई जाएगी। इसके पर्यवेक्षण हेतु स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों का प्रखंड आवंटन एवं सभी डेवलपमेंट पार्टनर को सहयोग करने को बताया गया है। डीपीओ आईसीडीएस रश्मि वर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने क्षेत्र के सभी घरों के भ्रमण कर लक्षित समूहों को एल्बेंडाजोल की दवाई खिलाना सुनिश्चित करेंगे तथा यह निश्चित करेंगे कि कोई भी छूटे नहीं। डीआइओ डा एके मिश्रा ने बताया कि इस कार्यक्रम में 13 लाख 75 हज़ार 050 बच्चों को अल्बेंडाजोल की दवाई खिलाने का लक्ष्य है। इस कार्यक्रम के सफलता हेतु कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं। सभी एफ एल डब्ल्यू का उन्मुखीकरण कराया गया है। इस कार्यक्रम में एसएमओ डा बसवराज, एस एम सी यूनिसेफ शशि कान्त सिंह,ओंकार चंद प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा मंजर, बीएचएम संजय कुमार, बीसीएम मनोज कुमार, अरूण झा आदि उपस्थित थे।
खाली पेट मे नही दी जाएगी दवा:
सिविल सर्जन डॉ अनिल कुमार सिन्हा ने कहा यह दवा खाली पेट में नहीं दिया जायेगा। बताया कि एक से दो साल तक के बच्चों को आधा टेबलेट व उससे अधिक उम्र के लोगों को एक टेबलेट देनी है। कहा कि भारत सरकार के निर्देशानुसार 1 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को कृमि मुक्ति करने के लिए राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अभियान के तहत आंगनबाड़ी जाने वाले लक्षित 1 से 5 वर्ष तक के बच्चों तथा स्कूल जाने वाले 6 वर्ष 19 वर्ष तक के बच्चों एवं स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों को आशा कार्यकर्ता द्वारा गृहभ्रमण कर एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया बच्चों में कृमि संक्रमण अस्वच्छता तथा दूषित मिट्टी के संपर्क में आने से होती है। कृमि संक्रमण से बच्चों के पोषण स्तर तथा हीमोग्लोबिन स्तर पर दुष्प्रभाव पड़ता है। जिससे बच्चों में शारीरिक व बौद्धिक विकास बाधित होती है। कार्यक्रम के दौरान कोविड-19 द्वारा निर्गत निर्देश जैसे- सामाजिक दूरी, व्यक्तिगत स्वच्छता, मास्क, सैनिटाइजर का उपयोग आवश्यक होगा।
21 सितंबर तक मनाया जाएगा अभियान, आंगनवाड़ी सेविका को किया गया प्रशिक्षित:
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एके मिश्रा ने बताया प्रदेश के 13 जिलों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस की शुरुआत की गई है। सभी सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि नाशक दवा खिलाई जाएगी। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, एवं शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। जिनकी निगरानी में स्कूलों में दोपहर के भोजन के बाद बच्चों को कृमि नाशक दवा खिालाई जाएगी। इस दवा के सेवन से वंचित रहने वाले सभी छूटे हुए बच्चों को चिह्नित चिन्हित कर उन्हें विद्यालयों व आंगनबाड़ी केन्द्रों पर लाकर दवा खिलाई जाएगी।
दवा का सेवन कराते समय बरतनी होगी यह सावधानी:
डीसीएम संजय कुमार ने बताया राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के दौरान बच्चों को दवा खिलाते समय कुछ सावधानी भी बरतनी होगी। जैसे कि अगर किसी बच्चों की कोई गम्भीर बीमारी का इलाज चल रहा है और वह नियमित रूप से दवा खा रहा है, कोई भी बच्चा सर्दी ,खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ से बीमार है तो, उसे यह दवा नहीं खिलाई जाएगी। दवा नुकसान नहीं करेगी लेकिन सावधानी के तहत ऐसे बच्चों को दवा नहीं दी जाएगी। 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली को चुरा बनाकर पानी के साथ, 2 से 3 वर्ष एक पूरी गोली चुरा बनाकर पानी के साथ तथा 3 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली चबाकर खिलाया जाना है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उद्देश्य:
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का उद्देश्य बच्चों के समग्र स्वास्थ्य पोषण की स्थिति, शिक्षा तक पहुंच और जीवन की गुणवत्ता में बढ़ोतरी के लिए विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 1 से 19 वर्ष की आयु के बीच के विद्यालय जाने से पहले और विद्यालय आयु के बच्चों (नामांकित तथा गैर नामांकित) को कीड़े समाप्त करने की दवा(कृमि नाशक) देनी है।
कृमि संक्रमण के लक्षण
-कृमि संक्रमण पनपने से बच्चे कुपोषित हो जाते हैं है।
-बच्चों के शरीर में खून की कमी हो जाती है।
-बच्चे हमेशा थकान महसूस करते हैं है
-बच्चों की का शारीरिक व मानसिक विकास भी बाधित हो जाती है।
-बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की भी कमी हो जाती है।
कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय
-नाखून साफ और छोटे रखें,
-हमेश साफ और स्वच्छ पानी ही पीऐं,
-खाने को ढक कर रखें
-साफ पानी में फल व सब्जियां धोएं
-अपने हाथ साबुन से धोए विशेषकर खाने से पहले और शौच जाने क के बाद
-घरों के आसपास साफ-सफाई रखें
-खुले में शौच न करें करे हमेशा शौचालय का प्रयोग करें।