किसानों के 3514 एकड़ खेत में मक्के की फसल लगाई है. परंतु 90 प्रतिशत बालियों में दाना नहीं आया. जिससे किसानों में काफी मायूसी है. इस संबंध में किसान खुशीलाल महतो, ब्रह्मदेव महतो, रूदल महतो,कैलाश दास, रामबालक महतो, परमेश्वर महतो, लक्ष्मी पासवान, सियाराम महतो, प्रभु पासवान, संजीव कुमार, सुमित कुमारराम प्रकाश महतो, हरि महतो, भुनिलाल महतो, कमलेश्वर महतो, सहित आदि ने बताया, ‘हम लोगों ने दुकान से CP898 मक्का का बीज अक्टूबर से नवंबर 40 से 60 वाले की खरीदारी किए थे. हमलोगों ने उम्मीद लगाकर कड़ी मेहनत के साथ मक्के की खेती की थी. खेती करने में हमलोगों को 2000 प्रति कट्ठा खर्च भी लगा. परंतु यही उम्मीद थी कि फसल अच्छा होने पर मुनाफा अच्छा होगा. परंतु मक्के का फसल बर्बाद हो गया है’. जानकारी मिलने पर जांच में पहुंचे पूसा कृषि विवि के वैज्ञानिककिसान अपनी समस्याओं को लेकर प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी एवं जिला स्तरीय पदाधिकारी को सूचना दी थी. जिसके बाद इसकी जानकारी डॉ.राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा को दी गई. इस दौरान विवि के अधीनस्त कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के हेड वैज्ञानिक डॉ.आर के तिवारी जांच में पहुंचे. उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए खेत में लगी फसल की काफी बारीकी से जांच की. खेत में लगे मक्के की सैंपल लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि इस समय मक्के के बालियों में दाना आ जाना चाहिए था. परंतु इसकी समय भी समाप्त हो गई है. लेकिन अब तक मक्के की फसल के बलियों में दाना नहीं आया है. इसकी जांच कर रिपोर्ट विवि को एवं जिला प्रशासन को दी जाएगी. जांच के बाद ही इसका पता चल पाएगा कि अब तक इस मक्के की फसल के बलियों में दाना क्यों नहीं आया है?