दरभंगा।कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा हर्षोल्लास से मनाये जा रहे सात दिनों से संस्कृत सप्ताह महोत्सव का आज दिनाङ्क 25 अगस्त 2021 को समापन समारोह का आयोजन आनलाइन किया गया |आज संस्कृत सप्ताह के अन्तिम दिन कामेश्वरसिंह-दरभङ्गा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशिनाथ झा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संस्कृत के अभ्युत्थान और प्रचार-प्रसार के लिए संस्कृत सप्ताह का आयोजन एक अवसर प्रदान करता है | उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा शब्दों की विशाल राशि को धारण करती है | पाणिनीय व्याकरण में लगभग 2000 धातुएं निर्दिष्ट हैं | जिनसे असंख्य शब्दों का निर्माण होता है। इन्हीं धातुओं से निर्मित शब्द ही तत्सम या तद्भव शब्द के रूप में संसार की अन्य सभी भाषाओं में आज भी प्रचलित हैं। गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष छात्र संख्या में हो रही वृद्धि पर उन्होंने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। कुलपति ने संस्कृत भाषण प्रतियोगिता और सद्यः भाषण प्रतियोगिता में छात्रों की प्रस्तुति देखकर कहा कि संस्कृत भाषण प्रतियोगिता में छात्रों का धाराप्रवाह प्रदर्शन तो अच्छा था ही साथ ही सद्यः संसंकृत भाषण प्रतियोगिता में भी छात्रों ने अज्ञात विषय में भी अपनी प्रस्तुति दी, यह प्रशंसनीय है| उन्होंने विश्वविद्यालय में नवनियुक्त शिक्षकों की भी प्रशंसा की| आज आयोजित संस्कृत सप्ताह समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. चन्द्रकान्त शुक्ल उपस्थित थे, जो राष्ट्रपति सम्मानित भी हैं और इस विश्वविद्यालय के पूर्व-कुलपति और प्रति-कुलपति भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम में हमें संस्कृतज्ञ ही नहीं बल्कि संस्कृतानुरागियों के साथ भी जुड़ने का प्रयास करना चाहिए| उन्होंने सभी संस्कृत संस्थाओं से अनुरोध किया कि वे संस्कृत के विकास के लिए एक कार्य-योजना बनाकर तदनुरूप कार्य करते रहें। हरेक भारतीय नागरिकों को संकल्प लेना चाहिए कि वे अपनी रुचि के अनुसार संस्कृत के एक-एक ग्रन्थ का चयन कर उसके कुछ अंशों को हम नित्य पढ़ेंगे। एक ग्रन्थ की समाप्ति के बाद पुनः दूसरे ग्रन्थ को पढ़ना प्रारम्भ करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में लोगों का संस्कृत के प्रति उत्साहवर्धक आकर्षण है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित दरभंगा विधान सभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के विधायक संजय सरावगी ने कहा कि संस्कृत को बढ़ावा देना चाहिए क्योंकि इससे लोगों का चित्त शुद्ध होता है। लोगों का चित्त शुद्ध होने पर ही हमारी वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना फलीभूत हो सकती है। संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन के लिए छात्रों की कम संख्या होना हम सभी के लिए विचारणीय है। इसके लिए कम से कम विद्यालयीय स्तर पर संस्कृत अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने इस विश्वविद्यालय को केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने में सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जब बिहार के राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति पद पर विराजमान थे, उस समय इस विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनवाने के लिए उनके द्वारा ज्ञापन भी दिया गया था। मेरा प्रयास आगे भी जारी रहेगा।
विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. सिद्धार्थ शंकर सिंह ने अपने विशिष्ट उद्बोधन में प्रतिदिन संस्कृत के लिए समर्पण रहने को कहा। समारोह के आरम्भ में अतिथियों का स्वागत कुलानुशासक प्रो. श्रीपति त्रिपाठी द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिदिन संस्कृत में कुछ भी बोलने को कहा। धन्यवाद ज्ञापन स्नातकोत्तर ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. कुलानन्द झा द्वारा किया गया।
संस्कृत-सप्ताह के संयोजक छात्र कल्याण अध्यक्ष प्रो. सुरेश्वर झा द्वारा प्रतियोगिताओं में पुरस्कार के लिए चयनित छात्रों के नाम की घोषणा करते हुए प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सभी इसी तरह प्रतियोगिताों में भाग लेते रहें, इससे आप लोगों के अन्दर छिपी प्रतिभायें समाज के समक्ष प्रगट होंगी और भविष्य में आप लोग ही अपने समाज और राष्ट्र के नहीं बल्कि पूरे विश्व के कर्णधार बन सकेंगे। संस्कृत भाषण प्रतियोगिता में निर्णायकों के निर्णय के अनुसार प्रथम पुरस्कार के लिए कृष्ण कुमार झा, द्वितीय पुरस्कार के लिए रचना और तृतीय पुरस्कार के लिए सत्या पाण्डेय के नाम उद्घोषित किये गये। इसी तरह सद्यः संस्कृत भाषण प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार के लिए शालिनी, द्वितीय पुरस्कार के लिए कृष्ण कुमार झा और तृतीय पुरस्कार के लिए गौतम पाण्डेय के नाम की घोषणा की गई।
अन्त में राष्ट्रगान के साथ इस वर्ष के संस्कृत सप्ताह महोत्सव की समाप्ति की घोषणा की गई।