संस्कृत सनातन की भाषा, दयानिधि का संस्कृत विरोधी वक्तव्य शर्मनाक – लक्ष्मी निवास पांडेय
संस्कृत का शब्द है दयानिधि और करुणानिधि
संजय मिश्र
दरभंगा
संसद में डीएमके नेता दयानिधि मारन के संस्कृत विरोधी वक्तव्य की संस्कृत यूनिवर्सिटी के कुलपति ने तीखी भर्त्सना की है। शुक्रवार को प्रेस रिलीज जारी कर के एस डी एस यू के कुलपति लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा है कि संस्कृत सनातन की भाषा है। यह विश्व के अधिकांश देशों में बोली जाती है। इतना ही नहीं, संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं को पुष्ट करती है। इसलिए इसकी गुणवत्ता किसी अन्य भाषा से अधिक है। कुलपति ने डीएमके नेता को आईना दिखाते हुए कहा कि दयानिधि और करुणानिधि संस्कृत के शब्द हैं।
कुलपति ने बताया कि सांसद दयानिधि का वक्तव्य अपमानजनक है। हर तरफ इस कुत्सित मानसिकता की आलोचना हो रही है। लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि दुनिया के अधिकांश देशों में संस्कृत बोली जाती है। उन्होंने सांसद के बयान को सभी दृष्टिकोण से नकारते हुए कहा कि सांसद की संस्कृत के प्रति ओछी सोच की हर सनातनी को विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की ज्ञान-परंपरा की आत्मा है और इस भाषा का विरोध करना भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं सभ्यता पर हमला करने के समान है।
उक्त जानकारी देते हुए विश्वविद्यालय के पीआरओ निशिकान्त ने बताया कि कुलपति पांडेय ने संस्कृत के संरक्षण व संवर्धन के लिए केंद्र सरकार और विशेष कर लोकसभा अध्यक्ष का आभार जताया। कुलपति ने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भविष्य की भी भाषा है। इसे संरक्षित करना हमारा सांस्कृतिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है। कुलपति ने कहा कि संस्कृत न केवल भारत की प्राचीनतम भाषा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर ज्ञान, विज्ञान, चिकित्सा, गणित, दर्शन, योग और साहित्य की आधारशिला रही है। संस्कृत को यूनेस्को सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों ने सबसे वैज्ञानिक भाषा के रूप में मान्यता दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ए आई की दुनिया में संस्कृत का बड़ा महत्व पूर्ण योगदान होने जा रहा है।
राजनीतिक कारणों से संसद में इस भाषा के विरुद्ध अनर्गल टिप्पणी करना भारतीय अस्मिता और सांस्कृतिक धरोहर का घोर अपमान है।

