दरभंगा । शोधार्थी संघ के अध्यक्ष रघुबर प्रसाद सिंह के नेतृत्व में शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रति-कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उप परीक्षा नियंत्रक प्रथम (पीएच०डी०) को शोधार्थियों को शिक्षण कार्य में शामिल करने हेतु ज्ञापन दिया। शोधार्थियों का मानना है कि यूजीसी द्वारा जारी पीएचडी रेगुलेशन-2016 (संशोधन- 2017 व 2018) के अनुसार अब पीएचडी पूर्णतः नियमित कोर्स है एवं कोर्स वर्क एवं पीएचडी के अवधि में न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति भी अनिवार्य है। परंतु विश्वविद्यालय में अबतक स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नहीं होने के कारण कोर्स वर्क पूर्ण होने के बाद पैट-2018 व पैट-2019 के शोधार्थी निष्क्रिय हो चुके है , जबकि उन्हें नियमित रूप से विश्वविद्यालय विभाग में उपस्थिति दर्ज करवाने की अनिवार्यता पीएचडी रेगुलेशन के 13.3 में अंकित किया गया है, परंतु किसी भी विभाग में अबतक इस तरह की व्यवस्था नहीं हो सका है। शिक्षण कार्य में शामिल करने से शोधार्थियों को अनुभव भी होगा। पीएचडी को शिक्षक बनने से पहले का ट्रेनिंग अवधि भी माना जाता है, ऐसे में शिक्षण कार्य में लगाये जाने से सभी शोधार्थी कुशल भी होंगे। मिथिला विश्वविद्यालय में पैट-2018 से यूजीसी का पीएचडी रेगुलेशन-2016 लागू हुआ है।
रघुबर प्रसाद सिंह ने कहा कि रेगुलेशन लागू हुए लगभग 4 वर्ष बीत चुका है, परंतु इस रेगुलेशन के सभी नियम अबतक लागू नहीं हो सका है। अभी भी पुरानी पद्धति से ही कार्य हो रहा है। शोधार्थियों को शिक्षण कार्य में लगायें जाने से शोधार्थी एवं अध्ययनरत छात्रों को भी इसका व्यापक लाभ मिल सकेगा। शोधार्थियों को सुविधानुसार विश्वविद्यालय विभाग/महाविद्यालय में शिक्षण कार्य में शामिल किया जाय ताकि शिक्षक बनने से पहले उन्हें शिक्षक बनने की दक्षता प्राप्त हो सके।