दरभंगा: दरभंगा के वकालतखाना भवन में वकीलों ने देश के चार अमर शहीदों रामप्रकाश बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खान, ठाकुर रौशन सिंह और राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को नमन किया। अधिवक्ता रमणजी चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित शहादत दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के हमारे क्रान्तिकारियों ने स्वाधीनता आन्दोलन को धारदार बनाने के लिए काकोरी कांड को अंजाम दिया था। जिसे लेकर मुकदमां दर्ज की गई। देश की आजादी के संघर्ष में क्रान्तिकारियों की किसी घटना का सर्वाधिक महत्व रहा, तो वह काकोरी कांड था। इस घटना ने अंग्रेजी हुकूमत को झकझोर दिया था। इसके प्रभाव से पूरे देश का जनमानस उद्वेलित हो देशभक्ति के जोश में भर गया। वैसे तो इस घटना में दस क्रांतिकारी ही शामिल थे, लेकिन इस आरोप में 40 देशप्रेमियों को गिरफ्तार किया गया था। इस मुकदमा में हमारे चार क्रान्ति वीरों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। 19 दिसंबर 1927 को रामप्रकाश बिस्मिल को गोरखपुर जेल में, अशफाक उल्लाह खान को फैजाबाद और ठाकुर रौशन सिंह को इलाहाबाद जेल में फांसी दी गई। वहीं राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को दो दिन पहले ही 17 दिसम्बर को गोण्डा की जेल में फांसी दे दी गई।
मौके पर अधिवक्ता विरेंद्र कुमार सिंह, अशोक कुमार मिश्रा, विजय नारायण चौधरी, कुमार उत्तम, अरुण कुमार मिश्रा, विनोद कुमार, मनोज कुमार, अमरनाथ झा, रामवृक्ष सहनी, संतोष कुमार सिन्हा, मायाशंकर चौधरी, हिरानंद मिश्रा, जयप्रकाश मिश्रा, संजय कुमार समेत दर्जनों वकीलों एवं अधिवक्ता लिपिक विनय कुमार चौधरी ने पुष्प निवेदित कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

